अधिकतम तापमान 32 तक पहुंचा, खेत में नमी होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही मौसम का मिजाज अप्रैल, मई की तरह हो गया है। 32 डिग्री सेल्सियस तापमान और तीखी धूप के कारण दोपहर में उमस भरी गर्मी का एहसास हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि तल्ख मौसम गेहूं की फसल के लिए हानिकारक है।
फरवरी में ऐसी गर्मी पांच साल के भीतर नहीं पड़ी थी। यह मौसम गुलाबी ठंड का माना जाता है। तापमान बढ़ने के साथ ही सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं। पिछले तीन-चार दिनों से जिस तरह तीखी धूप हो रही है। इससे लोग जाड़े का कपड़ा नहीं पहन रहे हैं। केवल सुबह और शाम ठंड का एहसास हो रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना के प्रभारी डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि फरवरी में अचानक तापमान में आई वृद्धि मुख्य रूप से गेहूं की फसल के लिए हानिकारक है। पश्चिमी विक्षोभ से इस वर्ष जाड़े में वर्षा नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
उन्होंने कहा कि इससे गेहूं के दाने महीन हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए गेहूं की जड़ों में नमी जरूरी है। किसान इस मौसम की बेरुखी को देखते हुए गेहूं की फसल में हल्की सिंचाई करें। इस बार दो से तीन सिंचाई जरूरी है। इसके अलावा देर से बोए गए चने की फसल में भी नमी जरूरी है। कहा कि सब्जी के लिए यह मौसम अनुकूल है ।
अरहर, तिलहन, दलहन फसलों के लिए भी यह मौसम अनुकूल है। आम के पेड़ों में बौर आ चुके हैं। उसके लिए भी पड़ रही यह गर्मी विशेष हानिकारक नहीं है। किसान गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए हल्के पानी देकर नमी बनाए रखें, यह जरूरी है।