ज्योतिषाचार्य के अनुसार, होलिका दहन पूर्णिमा कालीन भद्रा रहित समय में करने का ही विधान
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। होली का पर्व जनपद में आठ मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा। वहीं, होलिका पूजन एवं छह मार्च को होगा। ज्योतिषाचार्य भी इस बात पर एकमत दिख रहे हैं। उनका कहना है कि होलिका दहन पूर्णिमा कालीन भद्रा रहित समय में करने का ही विधान रहा है।
ज्योतिषाचार्य पं. विवेक उपाध्याय कहते हैं कि छह मार्च दिन सोमवार को सूर्योदय 06:11 बजे पर और चतुर्दशी तिथि का मान सायंकाल 03:56 बजे तक रहेगा। इसके बाद पूर्णिमा तिथि, इस दिन मचा नक्षत्र भी संपूर्ण दिन और रात्रि 11:53 बजे, सुधर्मा योग रात को 8:55 बजे और ध्वांक्ष नामक औदायिक योग है। दूसरे दिन यानी सात मार्च को पूर्णिमा सायंकाल 05:39 मिनट तक ही है और सूर्यास्त 05: 49 बजे पर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में सात मार्च को रात्रि के समय पूर्णिमा का अभाव है। सात मार्च को केवल काशी में ही होली खेली जाएगी। अन्य जगहों पर आठ मार्च को यह पर्व मनेगा।
उधर, पं. शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि शास्त्र के अनुसार होलिका का पूजन और दहन पूर्णिमा कालीन भद्रा रहित समय में किया जाता है। भद्रा के समय होली नहीं जलाई जाती। लेकिन रात भर भद्रा होने से भद्रा के पुंछ भाग में होलिका पूजन का भी विधान शास्त्रों में वर्णित है। प्रतिपदा, चतुर्दशी और दिन में होली का दहन नहीं किया जाता है। सात मार्च को रात में पूर्णिमा के अभाव के कारण होलिका का पूजन और दहन छह मार्च की रात में ही किया जाएगा। रंग भरी होली मधुमास में मनाई जाती है। ऐसे में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा होने से मधुमास का उत्सव यानी होली आठ मार्च को मनाई जाएगी।
उधर, कसया रोड स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी राजनारायणाचार्य कहते हैं कि सनातन धर्म को मानने वाले हिंदू संस्कृति में होली सर्वमान्य पर्व है। जो देशाचार के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत ढंग से मनाया जाता है। चांद्र मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन होकर दूसरे दिन रंग खेला जाता है। इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी और इसके बाद पूर्णिमा दिन सोमवार छह मार्च को प्रात:काल पांच बजे होलिका दहन होगा। कारण यह कि भोर में 4:48 बजे तक भद्रा है। होली का पर्व आठ मार्च को मनाया जाना शुभकारी होगा।