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Deoria News: हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से मांगा जवाब

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संवाद न्यूज एजेंसी
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देसही देवरिया। हेतिमपुर नव सृजित नगर पंचायत के गठन में हुई मानकों की अनदेखी के मामले में दायर याचिका को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश प्रतिंकर दिवाकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य चुनाव आयोग, सचिव पंचायत राज, सचिव नगर विकास सहित डीएम से भी मामले में जवाब तलब किया है।
नगर निकाय चुनाव का प्रचार प्रसार तेजी से चल रहा है। उम्मीदवारों के बीच इस बात की आशंका बनी हुई है कि कहीं उनकी मेहनत पर पानी न फिर जाए।
शासन स्तर से नगर पंचायत के गठन में तय मानकों की अनदेखी कर नव सृजित हेतिमपुर को नगर पंचायत बनाए जाने के विरोध में चार ग्राम प्रधानों ने भुजौली गांव के प्रधान रामप्रताप सिंह की अगुवाई में हाईकोर्ट में याचिका की।
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मुख्य न्यायमूर्ति प्रतिंकर दिवाकर एवं न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ ने 26 अप्रैल को मामले की सुनवाई की। याचिका कर्ताओं की तरफ से मामले की पैरवी कर रहे हाईकोर्ट के अधिवक्ता गुलाब आनंद ने बताया कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति प्रतिंकर दिवाकर और न्यायाधीश एसडी सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। राज्य चुनाव आयोग (पंचायती एवं नगरीय निकाय), सचिव पंचायत राज, सचिव नगर विकास, जिला निर्वाचन अधिकारी देवरिया, डीएम देवरिया, सहित सदर एसडीएम से मामले में जवाब-तलब कर उन्हें अपना पक्ष रखने को कहा है।
हेतिमपुर नव सृजित नगर पंचायत में शामिल पांच ग्रामसभाओं की कुल आबादी मानक के अनुसार 20,000 से कम थी। इसलिए जिला प्रशासन ने मामला फंसते देख आनन-फानन में बगल के सहोदरपट्टी गांव को शामिल कर आबादी पूरी कर शासन को प्रस्ताव भेज दिया। उसके आधार पर नगर पंचायत की घोषणा होते ही वहां की प्रधान माया देवी हाईकोर्ट चली गईं।
उनका कहना था कि उनके गांव को शामिल करने में आपत्ति आमंत्रित नहीं की गई। हाईकोर्ट ने सहोदरपट्टी गांव को शामिल करने के अंतिम नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी। उसके बाद गांव के जितेंद्र कुमार वर्मा ने हाईकोर्ट में एक अलग याचिका दायर कर जरूरी औपचारिकताओं को पूरा कर गांव को दोबारा नगर पंचायत में शामिल किए जाने की गुहार लगाई। बाद में उनकी याचिका खारिज हो गई।
उधर, नगर पंचायत में शामिल पांच ग्रामसभाओं में से चार गावों के प्रधानों ने भुजौली के प्रधान रामप्रताप सिंह की अगुवाई में हाईकोर्ट में अपील दायर की है। शासन से तय मानकों की अनदेखी कर नगर पंचायत बनाए जाने का मामला उठाते हुए नगर पंचायत का गठन निरस्त किए जाने की मांग की।
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आबादी का 18,400 ही होना, सहोदर पट्टी गांव को अलग करने के बाद वहां की आबादी को अलग न करना, अनुसूचित जनजाति की संख्या शून्य दिखाना आदि शिकायत की प्रमुख बिंदु हैं। चुनाव प्रचार में अपना सब कुछ झोंक चुके उम्मीदवारों में चुनाव को लेकर इस बात का संशय और भी बढ़ गया है कि बीच में उन्हें कोई दिक्कत न हो जाए।
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