नसों के सिकुड़ने से ब्लड सरकुेशलन में समस्या, ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
देवरिया। हाड़ कपा रही ठंड लोगों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही। तापमान में कमी की वजह से कई लोगों में नसें सिकुड़ने की समस्या सामने आ रही है। इससे ब्लड सरकुेशलन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से मेडिकल कॉलेज में इन दिनों लकवा और ब्रेन स्ट्रोक की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
इनमें ऐसे मरीज अधिक हैं जिन्हें बीपी व सुगर की समस्या पहले से है। डॉक्टर नियमित जांच कराने और सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। सिरसिया गोठा की मुखली देवी अपने दिनचर्या में लगी थी। इसी बीच उनकी आवाज लड़खड़ाने लगी और एक हाथ और पैर ने काम करना बंद कर दिया। फिलहाल वह महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।
मेडिकल कॉलेज में इस तरह की समस्या के पांच मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि इमरजेंसी से हर रोज करीब पांच गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। भागलपुर क्षेत्र की माधुरी यादव कुछ दिन पहले ब्रेन स्ट्रोक की शिकार हो गईं। उनका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है।
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बोलने में दिक्कत हो, संतुलन बिगड़े तो तत्काल करें डॉक्टर से संपर्क
मेडिकल कॉलेज के डॉ. सिराजुद्दीन ने बताया कि ठंड बढ़ने से नसें सिकुड़ती हैं और खून का थक्का बनने की स्थिति बढ़ जाती है। इसकी वजह से खून के संचार प्रभावित होता है। इससे ब्रेन, नाक की नसों के फटने की संभावना होती है। कभी-कभी नाक से खून और दिमाग की नस फटने से व्यक्ति स्ट्रोक व लकवा से ग्रसित हो सकता है। ब्लड प्रेशर, शुगर, तनाव, चिंता, धूम्रपान, मोटापा, अनियमित दिनचर्या, खानपान आदि इस समस्या को और बढ़ावा देती हैं। बताया कि बात करते समय अचानक मुंह टेढ़ा हो जाए, बोलने में दिक्कत हो, हाथ न उठे और संतुलन बिगड़े तो सतर्क हो जाना चाहिए। यह ब्रेन स्ट्रोक व लकवा के लक्षण हो सकते हैं। तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय रहते इलाज होने पर मरीज को कम नुकसान होगा।
ये बरतें सावधानियां
ठंड से बचें, शरीर ढक कर रखें।
घर से बाहर निकलने पर, जहां अलाव मिले सेक लें।
बीपी, शुगर, कोलेस्ट्राल की जांच कराते रहें।
नशे से परहेज करें।
तली, भूनी चीजों का सेवन कम करें।
पौष्टिक भोजन करें, प्रोटीन और फाइवर का अधिक सेवन करें, ज्यादा पानी पीएं।