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पिड़रा पुल पर भीषण कटान, दहशत में 52 गांवों के लोग

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पिड़रा पुल पर भीषण कटान करती गोर्रा नदी - फोटो : DEORIA
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पिड़रा पुल पर भीषण कटान, दहशत में 52 गांवों के लोग
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आधी सड़क कटकर गोर्रा नदी में विलीन, पुल का एप्रोच धंसा
रुद्रपुर-करहकोल मार्ग पर आवागमन ठप
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। गोर्रा नदी पर बने पिड़रा पुल के पास भीषण कटान शुरू हो गई है। रविवार को सुबह नौ बजे पुल का उत्तरी एप्रोच कट कर गिरने लगा। देखते ही देखते टू लेन की आधा से अधिक सड़क कट कर नदी में विलीन हो गई। तहसील और जिला मुख्यालय को जाने वाली सड़क कटने से दोआबा के 52 गांवों की करीब दो लाख की आबादी में हाहाकार मच गया है।
कटान की सूचना पर मौके पर पहुंचे एसडीएम ध्रुव शुक्ला ने पीडब्लूडी और सिंचाई विभाग को बचाव कार्य में लगा दिया। एसडीएम सुबह से ही कटान स्थल पर कैंप कर रहे हैं। खतरनाक ढंग से सड़क कटने से रुद्रपुर-करहकोल मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है। कटान रोकने के लिए पेड़ काट कर डाले जा रहे हैं। सड़क के नीचे की मिट्टी कट कर नदी में बह जाने से स्थिति नियंत्रण में नहीं आ रही है। पुल का एप्रोच धंसने से स्थिति भयावह होती जा रही है। हालांकि, प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में कर लेने का दावा कर रहा है।
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दोआबा क्षेत्र का तहसील मुख्यालय से कटा संपर्क
रुद्रपुर। पिड़रा में गोर्रा नदी के रौद्र रूप अख्तियार करने के बाद शुरू भीषण कटान के कारण रुद्रपुर पिड़रा मार्ग पर आवागमन पूर्ण रूप से रोक दिया गया है। कटान से सड़क के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। खतरा भांप कर प्रशासन ने इस मार्ग पर आवागमन पर रोक लगा दी है। सीमावर्ती गोरखपुर जिले के गांवों से आने वाली गाड़ियों का मार्ग बदल दिया गया है। दोआबा के 52 गांवों सहित गोरखपुर जिले से आने वाली गाड़ियों को नरायनपुर होकर तहसील और जिला मुख्यालय भेजा जा रहा है। सुरक्षा के लिए पुल के दक्षिणी छोर पर एकौना पुलिस और पुल के उत्तरी छोर पर रुद्रपुर पुलिस की फोर्स लगा दी गई है।
वर्जन
एसडीएम ध्रुव शुक्ला ने कहा कि नदी के कटान से सड़क और एप्रोच को नुकसान ज्यादा नुकसान हुआ है। कटान रोकने का प्रयास हो रहा है। सुरक्षा कारणों से पिड़रा मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है। स्थिति सामान्य होने में 24 घंटे लग सकते हैं। स्थिति सामान्य होने के बाद ही आवागमन बहाल किया जाएगा। कटान स्थल पर बचाव कार्य तेजी से हो रहा है। पुलिस और प्रशासन के लोग स्थिति सामान्य होने तक कैंप करते रहेंगे।
फोटो समाचार
दो पक्के पुलों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा
मरम्मत के नाम पर खर्च हो चुके हैं लाखों रुपये
दो नदियों के बीच घिरी है दोआबा की दो लाख आबादी
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर/एकौना। बाढ़ की आपदा से जिले के सबसे अधिक प्रभावित रुद्रपुर के दोआबा की दो लाख की आबादी बाढ़ से हर साल बर्बादी झेलने को विवश है। यहां बाढ़ सुरक्षा के नाम पर पानी की तरह धन बहाने के बाद भी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। आग लगने पर कुआं खोदने वाला बाढ़ खंड और लोक निर्माण विभाग जरूरी परियोजनाओं को नजरअंदाज कर रहा है।
पिड़रा घाट पुल का एप्रोच धंसकर सड़क कटने के बाद हरकत में आया प्रशासन यदि समय रहते संवेदनशील जगहों पर ठोस कार्ययोजना बना लेता तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। दो नदियों के बीच बसे दोआबा के 52 गांवो की दो लाख आबादी के लिए राप्ती और गोर्रा नदी शोक साबित हो रही है। पिछले 40 साल से आधा दर्जन गांवों का अस्तित्व मिटा चुकीं नदियां अब दो पक्का पुलों के लिए खतरा बनती जा रही हैं।
दोआबा को तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले दो पक्का पुलों पर कई वर्षों से खतरा मंड़रा रहा है। नरायनपुर और पिड़रा में बके पक्के पुल के एप्रोच को नदी कई बार काट चुकी है। एप्रोच कटने पर हर बार पीडब्लूडी और बाढ़खंड बचाव के नाम पर लाखों रुपये का हिसाब बना लेता है। पिड़रा में पुल के दक्षिणी छोर पर भी नदी एप्रोच को काट रही है। यहां बीते वर्ष नदी के किनारे बना एक पक्का मकान धराशायी हो गया। नदी की धारा पुल के आखिरी छोर से सटकर बह रही है। इस कारण कटान तेज हो रही है।
दोआबा के किसान नेता सब्बीर अहमद ने कहा कि नदी की धारा अप्रत्याशित ढंग से मुड़ गई है। इससे पुल के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। वह दिन दूर नहीं जब पुल के दोनों तरफ की सड़क कट जाए और पुल पानी के बीच खड़ा रहे। सपा नेता हरेंद्र सिंह त्यागी ने कहा कि पुल और सड़क को बचाने के लिए प्रशासन को गंभीरता से काम करना होगा।
पिड़रा और नरायनपुर के दोनो पुलों पर खतरा है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी कम होने के बाद भी काटन तेजी से हो रही है। पुल और रास्ता सुरक्षित नहीं रहा तो बाढ़ आने पर दोआबा के लोगों को जान बचाने के लिए कोई रास्ता नहीं मिलेगा।
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इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने कहा कि पुल के एप्रोच को बचाने के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाकर शासन में भेजा जाएगा। फिलहाल, कटान को काबू में कर लिया गया है। एप्रोच सुरक्षित है।
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