देवरिया। सीएमओ कार्यालय में भ्रष्टाचार की जांच करने लखनऊ निदेशालय से पहुंची टीम ने बिना टेंडर अलग-अलग फर्मों से छोटी-छोटी रकम की खरीदारी का मामला पकड़ा है। इसके अलावा सामानों की खरीदारी से जुड़ी कई पत्रावलियां भी नहीं मिल रही हैं। सीएचसी पर दी गई सामानों की सप्लाई में भी गड़बड़ी मिली है।
सीएमओ कार्यालय की शिकायत जिले के आला अफसरों तक लगातार पहुंच रही थी। गैर विभागीय अधिकारियों ने कई बार जांच की और सीएमओ और कार्यालय के बाबूओं को क्लीनचिट दे दी। रामपुर कारखाना विधायक सुरेंद्र चौरसिया ने भ्रष्टाचार और टेंडर में धांधली की शिकायत शासन में की थी। शासन के निर्देश पर लखनऊ निदेशालय से जेडी के नेतृत्व में पहुंची चार सदस्यीय टीम को गड़बड़ी मिली है। जांच टीम के अनुसार सात माह में डेढ़ करोड़ रुपये के सामानों की खरीदारी अलग-अलग फर्मों से की गई है। इसके अलावा टीबी विभाग में 29 लाख की खरीदारी भी बिना टेंडर के की गई है।
खरीदारी के बाद स्टोर से सीएचसी पर भेजे गए सामानों में भी हेराफेरी सामने आई है। ऐसे में अधिकांश बिंदुओं की जांच में धांधली सामने आई है। सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि जांच टीम ने जो भी साक्ष्य मांगा उपलब्ध करा दिया गया है। अब यहां से कोई मतलब नहीं है।
डीएम के माध्यम से कराई गई जांच में मिल चुकी है क्लीनचिट
- सीएमओ कार्यालय में होने वाले भ्रष्टाचार में शामिल जिम्मेदारों के हाथ इतने लंबे हैं कि जांच अधिकारी भी इनके सामने कमजोर पड़ जाते हैं। एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने 1.40 करोड़ की हुई खरीदारी में धांधली की शिकायत डीएम से अपने पैड पर की थी। जांच के लिए डीएम ने टीम गठित की, लेकिन जांच में गड़बड़ी नहीं मिली। रुद्रपुर के विधायक जयप्रकाश निषाद भी सीएमओ कार्यालय में हुई अनियमितता की शिकायत तत्कालीन डीएम से कर चुके हैं। अब रामपुर कारखाना विधायक सुरेंद्र चौरसिया की शिकायत पर शासन स्तर से जांच शुरू हुई है।
जांच में हुई गड़बड़ी तो विधानसभा में उठेगा मामला
- रामपुर कारखाना के विधायक सुरेंद्र चौरसिया ने बताया कि पूर्व में सीएमओ कार्यालय की हुई जांच रिपोर्ट की कॉपी लगाकर भ्रष्टाचार की शिकायत की गई है। जांच में गड़बड़ी की गई तो यह मुद्दा विधानसभा में उठाऊंगा, क्योंकि सीएमओ का विभागीय जिम्मेदारों के गठजोड़ की वजह से पूर्व में कई जनप्रतिनिधियों की ओर से कराई गई जांच गलत किया गया है। शासन स्तर से चल रही जांच में गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।
...तो होटल का भुगतान सीएमओ कार्यालय से हुआ
-जिस होटल में शासन के निर्देश पर जांच करने लखनऊ निदेशालय से टीम आई थी। वह शहर के एक होटल में रुकी थी। चर्चा है कि सीएमओ कार्यालय के एक संविदा बाबू या एसीएमओ की ओर से ऑनलाइन भुगतान किया गया है। होटल में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज की जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी।