नगर के नशहरा वार्ड में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन लोगों को बेटियों के महत्व के बारे में बताया गया। पं. उमाशंकर पांडेय ने कहा कि पृथ्वी पर जीव, समाज और परिवार पर जब भी संकट आया है। नारी ने अपनी भूमिका बड़ी जिम्मेदारी से अदा की है। मानव को अच्छे कर्म करने पर ही बेटी प्राप्त होती है। जिससे वह कन्यादान कर पुण्य पाता है।सोमवार को कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का मंचन किया गया। शिव पार्वती की वेशभूषा में नन्हे बच्चों को देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए। शिव बारात का वर्णन सुनकर लोग रोमांचित हो गए। कथा वाचक ने कहा कि वृत्रासुर के आतंक से जब पूरी दुनिया में त्राहि मची थी तो पार्वती ने शिव से विवाह कर वृत्रासुर के संहारकर्ता को जन्म दिया। सुहाग पर आए संकट को सावित्री ने यमराज से प्राण वापस मांग कर टाल दिया। सीता दुनिया के महिलाओं के लिए अनुकरणीय बन गई। उन्होंने बेटियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा से दो घरों में उजाला फैलता है। इस अवसर पर जगदीश नरायण जायसवाल, डॉ. सतीश, कलावती देवी, सुशील पांडेय, अनिल कुमार, सुभाष आदि मौजूद रहे।