- भक्ति भाव को जागृत करने का सशक्त माध्यम है श्रीमद्भागवत
- शुकदेव-परीक्षित की झांकी देख भाव विभोर हुए श्रोता
- चिंरजी ब्रह्म सेवा समिति सोंदा की ओर से चल रहे श्रीमद्भगवत कथा का तीसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनूघाट। कथाव्यास डॉ. श्याम सुंदर पराशर ने कहा कि भक्ति निष्कपट और निष्काम होनी चाहिए। भक्ति के अभाव में भगवान के चरणों में शरण नहीं मिल सकती। भक्तों के गर्भ से जब ज्ञान और वैराग्य जैसे पुत्रों का जन्म हो तो जान लेना चाहिए की भक्ति अपने चरमोत्कर्ष पर है। भक्ति के जरिए ही भक्त भगवान को अपने वश में कर पाता है।
डॉ. परशर ने चिरंजी ब्रह्म सेवा समिति सोंदा की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार की शाम श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के बल पर गौकर्ण ने अपने भाई धुंधकारी जैसे महापापी को इसका महत्व सुनाकर मुक्ति दिलाई। भागवत कथा भक्ति भाव को जागृत करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने राजा परीक्षित की कथा भी सुनाई।
इस दौरान सिद्ध पीठ बारीपुर मंदिर के उत्तराधिकारी मंहत गोपालदास, डॉ. जेएन पांडेय, डॉ. अश्विनी मिश्र, महामंडलेश्वर भगवान दास, केशव मिश्र, संजय शंकर मिश्र, अनिल मिश्र, रवि प्रकाश मिश्र छोटे, डॉ. राजीव सिंह, विश्वनाथ मिश्र, अभय मिश्र, डॉ कमलेश मिश्र आदि मौजूद रहे।