देवरिया। पुरवा स्थित महालक्ष्मी मंदिर निर्माण के निकट चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तिसरे दिन राघव ऋषि ने जडभरत के प्रसंग का समापन करते हुए कहा कि समग्र सृष्टि भगवान श्रीहरि की है। सृष्टि का नियंत्रण करने के लिए मृत्युलोक में भगवान ने अपने सात प्रत्यक्ष ग्रहरूपी पार्षदों को नियुक्त किया है जो प्रतिक्षण मनुष्य को संचालित करते हैं। उन्होंने कहा कि सूर्य आत्मतत्व, चंद्रमा मन, मंगल सत्व, रजस व तमस तत्व, बुध वाणी, बृहस्पति प्रज्ञा व ज्ञान, शुक्र सुख व भौतिक संसाधन, शनि मनुष्य के सुख व दुख को नियंत्रित करता है। यदि धर्म की मर्यादा में रहकर जीव जीवन-यापन करता है तो उसे सुख व अंत में मुक्ति प्राप्त होती है। इस दौरान कृष्णावती यादव, अमरदीप यादव, भरत अग्रवाल, लालाबाबू श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।