जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के डायट के निरीक्षण के दौरान 18 नवंबर को खामियां मिलीं थीं। डीएम ने स्पष्टीकरण मांगा तो कर्मचारियों और प्राचार्य तरह-तरह के बहाने बनाते हुए रोचक जवाब दिया है। किसने उल्टी, दस्त, सिर दर्द तो किसी ने मोबाइल न चला पाने का बहाना बनाया है। इसके जरिए खेद प्रगट करते कर्मचारियों ने क्षमा याचना मांगी है। इनके जवाब से डीएम भी सोचने को मजबूर हैं कि ऐसे कर्मचारियों पर आगे की क्या कार्रवाई की जाए, ताकि व्यवस्था सुधर जाए।
डीएम ने डायट का निरीक्षण किया था। इस दौरान एक लिपिक मोबाइल पर फिल्म देखते हुए पाया गया था। कई खामियां मिलीं। उपस्थित पंजिका पर हस्ताक्षर कर नदारद मिले थे। यहां तक कि प्राचार्य उपस्थित पंजिका पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इस पर डीएम ने जवाब तलब किया था।
अपने बचाव में कनिष्ठ सहायक मुन्नी लाल ने कहा है कि शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीज हैं। डॉक्टर के अनुसार समय पर दवा खानी होती। निरीक्षण के दौरान दवा खाने के पहले दराज में अभिलेख रखकर नाश्ता कर दवा लिया। इसी दौरान पत्नी का फोन आया कि दवा समय से खा लें। फोन रखते समय अचानक आगमन हो गया, जिससे घबरा कर फोन चालू हालत में जेब में रख लिया। इंटरनेट आन होने के कारण अन्य प्रोग्राम चालू हो गया। इसके कारण फिल्म भी सामने आ गई। अभी तक नार्मल फोन चलाते थे, ऍड्रायड फोन हाल के दिन में लिए हैं, जिसे ठीक से चलाना नहीं आता है। वेतन बहाली के लिए क्षमा याचना करता हूं।
लिपिक गजेंद्र राव ने बताया है कि समय करीब 9:45 पर कार्यालय आए थे, लेकिन अचानक उल्टी, दस्त और सिर दर्द होने लगा। इसके कारण चले गए। भूलवश अवकाश का प्रार्थनापत्र नहीं दे पाए। वरिष्ठ लिपिक सुभाष गुप्ता ने बताया है कि परिषदीय स्कूलों का सपोर्ट सुपरविजन डायट के प्रवक्ता करते हैं। इसकी पंजिका शुरू से ही बनी हुई है। निरीक्षण के समय मूवमेंट उपस्थित पंजिका बताई नहीं जा सकी, जिसका हमें खेद है। इन्होंने अपनी सफाई में बताया है कि हर रोज कार्यालय समय से आते हैं।
प्राचार्य अनिल कुमार सिंह ने बताया है कि अब उपस्थित पंजिका में नाम हस्ताक्षर कर रहा हूं। डीएलएड कक्षाएं संचालित होने के कारण हम उपस्थित पंजिका में हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे, हमें इसका खेद है। सभी ने बाधित वेतन की बहाली के लिए गुहार लगाई है।