- आक्रोशित गांववालों ने शव रखकर मुख्य मार्ग पर किया प्रदर्शन
- रामपुर कारखाना के मझरटिया गांव का है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर कारखाना। थाना क्षेत्र के मझरटिया गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय से सोमवार को पढ़ाई कर घर लौट रही छह वर्षीय छात्रा की बाइक की चपेट में आने से मौत हो गई। दुर्घटना की जानकारी होते ही मौके पर जुटे ग्रामीणों ने सड़क पर शव रखकर डुमरी-बैतालपुर मार्ग जाम कर प्रदर्शन किया। पुलिस ने एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद परिजनों को मनाया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के मझरटिया गांव के पप्पू मद्धेशिया की छह वर्षीय बेटी संजना गांव के प्राथमिक विद्यालय के आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ती थी। सोमवार दोपहर वह विद्यालय से बाहर निकल रही थी कि अचानक डुमरी की तरफ से तेज गति से आ रहे एक बाइक सवार युवक ने उसे टक्कर मार दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए। गंभीर हालत देख डॉक्टरों ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। गोरखपुर ले जाते समय बैतालपुर से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। परिजन शव लेकर घर आ गए। इस बात की जानकारी होते ही गांव के लोग जुट गए। विद्यालय के पास डुमरी- बैतालपुर मार्ग पर शव रख लोग प्रदर्शन करने लगे। लोगों का आरोप था कि विद्यालय मुख्य मार्ग पर होने के बावजूद विद्यालय के शिक्षक मुख्य द्वार बंद नहीं कराते हैं और न ही बच्चों को सड़क पार कराने में मदद करते हैं। अगर ऐसा होता तो यह घटना नहीं होती। गांव के लोग शिक्षकों पर कार्रवाई और ब्रेकर बनाने पर अड़े रहे। सूचना पर फोर्स के साथ पहुंचे एसओ ने उच्चाधिकारियों से बात कर शिक्षकों पर कार्रवाई कराने और ब्रेकर बनवाए जाने का आश्वासन दिया, तब जाकर परिजन मानें। उसके बाद पुलिस ने शव कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई की।
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अज्ञात बाइक की चपेट में आने से बच्ची की मौत हो गई। गांव के लोग और परिजन प्रदर्शन कर रहे थे। उन्हें समझा-बुझाकर आवश्यक कार्रवाई की गई है।
.....राजेश कुमार पांडेय, एसओ
हादसे के बाद आंगनबाड़ी फरार
संजना के हादसे में घायल होने और उसकी मौत की सूचना मिलते ही आंगनबाड़ी और ज्यादातर शिक्षक विद्यालय से फरार हो गए। उनकी संवेदनहीनता को लेकर गांव के लोग और आक्रोशित हो गए।
विद्यालय का दरवाजा बंद रहता तो नहीं जाती जान
संजना की मां दुर्गावती देवी यह कहकर बेसुध हो रही थी कि अगर शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझे होते, दरवाजा बंद रखते और सड़क पार कराते तो उनकी बेटी हादसे का शिकार नहीं होती। उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। संजना दो बहनों में दूसरे नंबर पर थी जबकि उनके दो छोटे-छोटे भाई हैं। संजना के पिता पप्पू मद्धेशिया ठेले पर फल लगाकर गांव-गांव घूमकर बेचते हैं।