देवरिया। मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग में अल्ट्रासाउंड कराना मरीजों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। जांच कराने के लिए मरीजों को एक दिन पहले ही शाम से नंबर लगाना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लगी कुर्सियों पर मरीज एक दिन पहले से ही जूता-चप्पल, हेलमेट और थैला रखकर अपनी जगह सुरक्षित करते हैं। पूरी रात गुजारने के बाद सुबह नंबर आता है। अगर कोई सुबह नाै बजे पहुंचता है तो उसे निराशा हाथ लग रही है। उसे फिर शाम को पहुंचकर अगले दिन सुबह के लिए नंबर लगाना पड़ रहा है।
रविवार रात करीबन दस बजे महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग की कुर्सियों पर थैला, हेलमेट, पत्थर रखे हुए थे। महज चंद कदमों की दूरी पर रामनाथ देवरिया मोहल्ला निवासी ईश अहमद अपनी पत्नी के साथ बैठे हुए थे। उन्होंने बताया कि पत्नी का अल्ट्रासाउंड कराना है। अगर इसी समय से लाइन नहीं लगाएंगे तो सुबह अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाएगा। इसके कारण पत्नी सुभ्रा खातून को लेकर एमसीएच विंग पर आए हैं। विशुनपुर कला निवासी विमला देवी अपनी पौत्री को लेकर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लाइन लगाने आईं थीं। पूरी रात जगने के बाद दसवां नंबर था। भीखमपुर निवासी गीता देवी ने बताया कि बिना खाए-पीए घर से आई हूं, क्योंकि रात हो जाने पर साधन ही नहीं मिलेगा।
रात करीब 11 बजे एमसीएच विंग स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र के पास लगी 21 कुर्सियों पर लोग कुछ न कुछ रखकर इधर-उधर टहल रहे थे। कुछ लोग फर्श पर लेटकर सुबह का इंतजार कर रहे थे। एक व्यक्ति तो घर से टेबल फैन तक लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि पंखा कम होने के कारण गर्मी लग रही है तो थैले रखकर घर से टेबल फैन लेकर आया हूं।
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कोट:
अगर रात में आकर पहले से कुर्सी पर बैठकर इंतजार नहीं करती तो सुबह अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता। बिना खाए घर से आ गई हूं। सुबह जांच होने के बाद जाऊंगी। - विमला देवी, विशुनपुर कला
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घर तो नजदीक है, लेकिन अगर रात में आकर कुर्सी पर थैला नहीं रखता तो पत्नी का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता। घर छोड़ने के बाद नींद नहीं आती है। अब पूरी रात जागना पड़ेगा।
- ईश अहमद, रामनाथ देवरिया
पेट में दर्द आज तो अल्ट्रासाउंड 19 दिन बाद
देवरिया। मेडिकल कॉलेज के पुरुष अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए 19 दिन प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। हालत यह है कि अगर किसी को पेट दर्द सहित अन्य कोई परेशानी हो तो वह बाहर अल्ट्रा साउंड कराए या फिर 19 दिन के इंतजार के बाद उसका नंबर आएगा। इसमें भी कई बार ऐसा होता है कि रेडियोलाजिस्ट के न्यायालय कार्य से जाने के कारण अल्ट्रासाउंड जांच ठप हो जाती है। सोमवार को भी ऐसा ही देखने को मिला। पहले से नंबर लगाए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। जबकि हालत यह है कि यहां पर डॉक्टर अगर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखता है तो मरीजों को नौ सितंबर को बुलाया जा रहा है। बैतालपुर निवासी अमरीश कुमार ने बताया कि डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा था। पेट में दर्द हो रहा था। मजबूरी में बाहर का सहारा लेना पड़ रहा है। बरहज निवासी अजय मिश्रा ने बताया कि व्यवस्था इतनी खराब है कि पथरी के कारण पेट में दर्द हो रहा है और अल्ट्रासाउंड कराने के लिए समय 19 दिन बाद दिया जा रहा है। इस तरह तो सस्ता इलाज हो चुका। निजी सेंटर पर जांच कराने पर मरीजों को छह सौ से एक हजार रुपये तक खर्च उठाना पड़ रहा है।
महिला में 30 और पुरुष में 50 जांच है निर्धारित
- महिला और पुरुष अस्पताल में चार रेडियोलाजिस्ट का पद है, लेकिन दो रेडियोलाजिस्ट हैं। महिला में तीस और पुरुष में पचास लोगों का प्रतिदिन अल्ट्रा साउंड होता है। इसके बाद आने वाले लोगों को वापस लौटना पड़ता है। वह भी महिला अस्पताल में सुबह नौ से 11 बजे तक ही अल्ट्रासाउंड होता है।
मेडिकल कॉलेज में हर रोज मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता है। रेडियोलाजिस्ट की कमी है। इसके लिए शासन से मांग की है। रात में परेशान न होकर लोगों सुबह नंबर लगाना चाहिए।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस