खेतों में गेहूं की फसल पकने को है, पछुआ हवा अभी से दिखाने लगी है जोर
संसाधन, चालक व कर्मियों का दंश झेल रहा दमकल विभाग कैसे पाएगा आग पर काबू
शहर व गांव की संकरी गलियों में आग बुझाने पर दमकल विभाग को छूट जाएगा पसीना
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। खेतों में गेहूं की फसल पक कर तैयार होने को है और पछुआ हवा अभी से जोर दिखाने लगी है। गर्मी के मौसम में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। संसाधनों की अनुपलब्धता व फायर कर्मियों की कमी से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलकर राख हो जाती है। अग्निकांड से सैकड़ों परिवार बेघर हो जाते हैं। दुआ करें कि इस वर्ष आग लगने की घटनाएं न हों, नहीं तो हर वर्ष की तरह आग बुझाने के नाम पर अग्निशमन विभाग कुआं खोदता रह जाएगा।
महकमे में कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ ही सुविधाओं की बहाली के लिए कई बार प्रयास किए गए, पर इसे धरातल पर नहीं लाया जा सका। इसका खामियाजा लोगों को नुकसान कर भुगतना पड़ रहा है। इधर गर्मी के मौसम को देखते हुए गाड़ियों के मेंटिनेंस, पाइप, पंप आदि की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम शुरू कर दिया गया है। कुल 37 कर्मचारियों के भरोसे तकरीबन 35 लाख की आबादी को बेहतर सेवा मुहैया कराने के निरर्थक प्रयास किए जा रहे हैं।
तहसीलों में नहीं बन सके फायर स्टेशन
जिले के भाटपाररानी, सलेमपुर व रुद्रपुर में फायर स्टेशन बनाया जा रहा है। रुद्रपुर में फायर स्टेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, सलेमपुर व भाटपाररानी में अभी निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि, इन तीनों जगहों पर अस्थायी सब स्टेशन चलाकर कुछ राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के आखिरी छोर पर स्थित स्थानों पर शहर से ही गाड़ियों को भेजना पड़ता है।
37 कर्मी ही मौजूद, चालक के नहीं रहने से परेशानी
जिले में अग्निशमन विभाग में 53 कर्मियों की आवश्यकता है। इसमें से सिर्फ 37 कर्मी की तैनाती है। सात की जगह चार चालक व 37 कर्मियों के भरोसे अधूरी सेवाएं दी जा रही हैं। सबसे अधिक परेशानी अप्रैल, मई व जून माह में चालक कम रहने से होती है। तीन वाहन सलेमपुर, भाटपाररानी व रुद्रपुर में भेज दिए जाते हैं। चार में तीन चालक वाहन लेकर चले जाते हैं। इसके बाद जिला मुख्यालय और अन्य ब्लाॅकों में आग लगने की घटना होने पर विभाग के सामने चालक की कमी की समस्या खड़ी हो जाती है। इसके बाद जैसे-तैसे वह आग की घटनाओं पर काबू पाता है।
जिले भर में मात्र छह गाड़ियां
फायर अधिकारी राजमंगल सिंह ने बताया कि आग बुझाने के लिए विभाग के पास कुल छह गाड़ियां मौजूद हैं। जिला मुख्यालय पर तीन बड़ा वाटर टैंकर, 2 वाटर मिक्स गाड़ियां हैं। इसमें से दो छोटी व एक बड़ी गाड़ी को भाटपाररानी, सलेमपुर व रुद्रपुर में भेजकर सेवा दी जाती है। तीन सब स्टेशनों के निर्माण से समय से गाड़ियों को भेजकर आग की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
शहर व गांव की संकरी गलियों में आग बुझाने पर छूटेगा पसीना
गर्मी के मौसम में खेतों, खलिहान और अन्य जगहों पर अग्निशमन विभाग आग पर काबू पा लेता है परंतु शहर से लेकर गांव-देहात क्षेत्रों की संकरी गलियों में जब आग लगने की घटना होती है तो विभाग को पसीना छूट जाता है। जिले में चार वाटर टैंक से लैस वाहन तो मौजूद हैं परंतु वे बहुत बड़े हैं। गलियों में वह नहीं पहुंच सकती। दो छोटी गाड़ियां हैं तो उनमें सिर्फ हाइप्रेशर पंप लगे हैं। वे संकरी गलियों तक पहुंच तो जरूर जाती है परंतु पानी का इंतजाम नहीं होने के चलते नकारा साबित होती हैं। शहर की पंजाबी गली में दो माह पहले आग लगने की घटना हुई थी, जहां बड़ी गाड़ी नहीं जा पा रही थी। इसके बाद छोटी गाड़ी को भेजा गया तो पानी की समस्या खड़ी हो गई। इसके बाद नाली के गंदे पानी से आग पर काबू पाया जा सका।
जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता से आग लगने की घटना पर लग सकता है विराम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी के दिनों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है, क्योंकि, आग के फैलाव के लिए मौसम अनुकूल रहता है। इसमें कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जो मानव जनित कारणों से उत्पन्न होती हैं। जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता के साथ घटनाओं को कम किया जा सकता है। अग्निशमन अधिकारी राजमंगल सिंह ने बताया कि जिले में अभी 06 अग्निशमन वाहन उपलब्ध हैं। इनमें 2 नई तकनीक से युक्त हैं। उन्होंने कहा कि सावधानी ही बचाव या सुरक्षा है।
आग से बचने और जानमाल की सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ख्याल
खलिहान को हमेशा गांवों की आबादी और फसल से भी दूर खुले स्थान पर बनाएं।
थ्रेसर का उपयोग करते समय डीजल इंजन व ट्रैक्टर के साइलेंसर को लंबे पाइप से ऊंचाई पर रखें।
थ्रेसर का उपयोग करते समय पास में कम से कम 200 लीटर पानी भरकर अवश्य रखें।
खलिहान के आसपास छोटी-छोटी बाल्टियों में बालू भरकर रखें।
रोशनी के लिए सोलर लैंप, टॉर्च, इमरजेंसी लाइट आदि बैटरी वाले यंत्र का ही प्रयोग करें।
एक खलिहान से दूसरे खलिहान की दूरी 20 फीट से कम न रखें।
खलिहान वैसे जगह बनाएं जहां अग्निशमन वाहन आसानी से पहुंच सके।
खलिहान वैसी जगह हो जहां जलस्रोत नजदीक हो, जैसे तालाब, पैन, बोरिंग।
खलिहान के आसपास अलाव न जलाएं, यदि बहुत आवश्यक हो तो पानी भरीं बाॅल्टियां अवश्य पास में रखें।
बिजली के नंगे तारों के नीचे खलिहान नहीं बनाया जाए।
बांस के खंभे के सहारे नंगे बिजली के तार खेतों में न रखें। खेतों के आसपास बीड़ी-सिगरेट आदि न पीएं और न ही किसी को पीने दें।
देहाती क्षेत्रों में खासकर फूस और खपरैल के मकानों के निवासी खाना सुबह 8:00 बजे से पहले और शाम 5:00 से 6:00 के बीच (सूर्यास्त से पूर्व) बना लें।
दीप, लालटेन, ढिबरी आदि के प्रयोग में सावधानी बरतें।
जलती हुई बीड़ी, सिगरेट और माचिस की काठी के खलिहान में न फेंके।
आग बुझाने के लिए पानी, बालू और सूखी मिटटी, धूल का प्रयोग करें।
अग्निकांडों की सूचना अति शीघ्र अग्निशमन अधिकारी तक शीघ्र पहुंचाएं ताकि अग्निशमन वाहनों को त्वरित कार्रवाई के लिए भेजा जा सके।