देवरिया। जिले के तीन पुल सुसाइड प्वाइंट बन गए हैं। पारिवारिक विवाद व आपसी नोकझोंक के कारण तनाव में आकर लोग इन पुलों से कूदकर जान देने का प्रयास कर रहे हैं। बीते कुछ महीनों से इन पुलों से नीचे कूदने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है। महज तीन से चार माह में करीब पंद्रह घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बाद भी इन घटनाओं को रोकने के लिए कोई इंतजाम प्रशासन की ओर से नहीं किए जा रहे हैं।
शहर के गोरखपुर रोड स्थित ओवरब्रिज, कपरवारघाट, भागलपुर, नदावर घाट के पुल से कूद कर जान देने की घटना कई बार सामने आ चुकी है। बृहस्पतिवार को शहर के ओवरब्रिज से एक युवती ने कूद कर आत्महत्या की कोशिश की। संयोग रहा कि वह बच गई। जबकि कपरवार और भागलपुर पुल से कई बार ऐसी घटना हो चुकी हैं, जहां पर कूदने वाले व्यक्ति का पता नहीं चल सका है। कपरवार स्थित उग्रसेन पुल सुसाइड प्वाइंट बना हुआ है, जिससे नदी में कूदकर जान देने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीत एक पखवारे में अलग-अलग जगहों के तीन लोग किन्हीं कारणों से नदी में छलांग लगा चुके हैं। जिनमें पुलिस ने एक का शव बरामद किया है। लोगों के अनुसार पुल से अब तक 100 से अधिक लोग नदी में छलांग लगा चुके हैं। जबकि यहीं हाल भागलुपर पुल का भी है। दोनों जगहों पर सुरक्षा के उपाय भी नहीं है।
जुलाई में पुल से छलांग लगाने की घटनाएं
- सुरौली थाना के मलकौली गांव निवासी श्याम वर्मा (60) ने कपरवार पुल से छलांग लगा दी थी। उनका आज तक सुराग नहीं लग सका है।
- मदनपुर थाना क्षेत्र के खड़ेसर निवासी दया ने कपरवार पुल से नदी में कूदकर जान दे दी।
- पटना गांव निवासी छात्रा निक्की ने कपरवार पुल से नदी में छलांग लगा दी। एक दिन बाद शव मिला।
- सलेमपुर कस्बे के हरैया लाला वार्ड आठ निवासी गुड्डी देवी भागलपुर पुल से कूद कर जान दे दी।
बीते दिनों में हुई घटनाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि कपरवार उग्रसेन पुल सुसाइड प्वाइंट बना हुआ है। अब तक जिम्मेदारों का ध्यान आकृष्ट न होना गंभीर है। 10-15 दिन में पुल पर दोनों तरफ जाली लगवा दी जाएगी।
- अखंड प्रताप सिंह, जिलाधिकारी
जीवन में हमेशा साहस बनाकर रखना चाहिए। पूरे परिवार पर अभिभावक को ध्यान देना होगा। अक्सर यह देखने को मिलता है कि छोटी बातों को लेकर परिवार में विवाद हो जाता है। इसको लेकर लोग आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। ऐसे लोगों को समझाना चाहिए। समस्या का मिल बैठकर निदान करने से ऐसी घटनाएं रुक सकती हैं।
- डाॅ. विवेका मिश्र, समाजशास्त्री