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Deoria News: कुर्मीपट्टी के खेल मैदान से निकल रहीं फुटबाॅलर बेटियां

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देवरिया। बघौचघाट क्षेत्र के कुर्मीपट्टी का खेल मैदान फुटबाॅल की नर्सरी तैयार करने में जिले में अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां से निकलीं लड़कियां जिले व प्रदेश के साथ ही देश का भी नाम रोशन कर रही हैं। प्रशिक्षक जय कुमार राव की लगन का ही परिणाम है कि यहां से निकली हीना देश की अंडर-17 फुटबाॅल टीम की पहले कप्तान बनीं एवं वर्तमान में टीम की सदस्य हैं।इसके अलावा कई खिलाड़ी विभिन्न प्रदेशों में आयोजित फुटबाॅल लीग में भी खेल रही हैं।
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अक्सर जिद जब जुनून बन जाए तो जिंदगी बदल जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ जयकुमार राव के साथ। एक तरफ संसाधनों का रोना रोते सरकारी खेल प्रशिक्षक तो दूसरी ओर अभाव में ही गांव की बेटियों की प्रतिभा को निखार रहे जयकुमार।बिना किसी शुल्क के गांव की लड़कियों को फुटबॉल का प्रशिक्षण देते हैं। उनसे हुनर सीख कर बहुत सी बेटियां राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेल रही हैं।

जय कुमार खुद भी रहे हैं राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी
पथरदेवा ब्लॉक के छोटे से गांव मझौवा के जयकुमार राव खुद यूपी की टीम से 1982 से 83 तक राष्ट्रीय टीम में खेल चुके हैं। अब गांव के एक निजी काॅलेज में शारीरिक शिक्षक के पद पर सेवा दे रहे हैं। 15 वर्ष पूर्व वह अपने काॅलेज के लड़कों की टीम लेकर भभुवा गए थे। वहां लड़कियों एवं लड़कों की टीम से मुकाबला देखकर इस कदर प्रभावित हुए कि अपने गांव की लड़कियों को फुटबॉलर बनाने की जिद ठान ली। लोगों की टीका टिप्पणी को अनसुना किया तो अब गांव की बहुत सी लड़कियां अंतरराष्ट्रीय स्तर की फुटबॉलर बन गई हैं।
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अब तो आसपास के गांव के भी अभिभावक अपनी बेटियों को फुटबॉल के प्रशिक्षण के लिए उनके पास भेज रहे हैं।


राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहीं 25 लड़कियां
गांव के मैदान में बेटियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे जयकुमार से फुटबॉल सीख कर विगत वर्षों में 25 से अधिक लड़कियां राष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हैं। वहीं मैदान पर अब 50 बेटियां सुबह-शाम नियमित अभ्यास कर रही हैं। बिहार सीमा के नजदीक गांव में बेटियों को फुटबॉल खेलते देखकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं। राव का सपना है कि भारत की महिला टीम हो उसमें पथरदेवा की बेटियां प्रतिनिधित्व करें। इसी मुहिम के तहत बेटियों को तैयार कर रहे हैं। उनका सपना मूर्त रूप ले रहा है। इन्हीं से प्रशिक्षण ले रहीं हीना देश की अंडर-17 टीम की कप्तान हैं, जो सैफ गेम खेल चुकी हैं, और अब एशिया कप खेलने थाइलैंड गई हुई हैं। उनका कहना है कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के इस दौर में उनकी कोशिश से बेटियों को कमजोर समझने की सोच भी बदलेगी।

अलग- अलग फुटबाॅल लीग में बेटियां दिखा रहीं पैरों का जादू
मुरार छापर की आयशा, मझौवा की सोनाक्षी, हरफोडा की सुष्मिता, फरीदा अंसारी व मुस्कान, गुरमिया की शालिनी, कंठीपट्टी की आकांक्षा, रुखसार, नेहा, वंदना राष्ट्रीय स्तर की टीमों में खेल रही हैं। सोनाक्षी, सुष्मिता, मुस्कान कर्नाटक लीग खेल रही हैं। वहीं यूपी की अंडर-14 टीम में अर्चना यादव कर्नाटक खेलने गई हैं। अगले महीने शुरू हो रहे दिल्ली लीग में फरीदा, नेहा कुमारी, वंदना, आयशा का चयन हुआ है। रुखसार पंजाब यूनिवर्सिटी गेम खेलने जाएंगी। वहीं सोनाक्षी, आयशा, सुष्मिता, फरीदा, नेहा, वंदना, रुखसार, मुस्कान कई बार अलग-अलग टीमों से नेशनल खेल चुकी हैं।

आसान नहीं था इस खेल से बेटियों को जोड़ना
ताकत और मेहनत के इस खेल में बेटियों को तैयार करना आसान नहीं था।संसाधन तो दूर खेल के लिए माहौल भी अनुकूल नहीं था। जय कुमार के चार साल के प्रयास के बाद लोग इस बात को समझ सके और वर्ष 2014 में उन्होंने प्रशिक्षण देना शुरू किया। इसके पहले गांव-गांव जाकर लोगों से बात की। तमाम स्कूल में जाकर बेटियों को समझाया और फुटबॉल खेलने का आग्रह किया। वह कहते हैं कि बेटियों को फुटबॉलर बनाने में खर्च भी बहुत है, लेकिन क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से यह कमी भी दूर हो जाती है।
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