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Deoria News: कोहरे के साथ जहरीली हवा ने सुबह की सैर पर लगाया ब्रेक

Sun, 29 Dec 2024 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया। जिले में ठंड बढ़ते ही सुबह और शाम कोहरा छा जा रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण भी बढ़ा है। शनिवार की सुबह एक्यूआई 170 पर पहुंच गया। इसकी वजह से सुबह टहलने निकलने वालों को परेशानी हो रही है। कुछ लोग इन दिनों सुबह टहलना छोड़ दिए हैं और घर पर ही व्यायाम व योग कर अपने को फिट रख रहे हैं। वहीं सांस, खांसी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। बीपी, शुगर के मरीजों को भी परेशानी हो रही है। इस मौसम में डॉक्टर भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। मौसम बदलने से ठंड बढ़ी है। कोहरा और प्रदूषित हवा की वजह से लोगाें के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। वायुमंडल में नमी के कारण वाहनों के धुएं, धूल के कण के परत बन गए हैं। कोहरा और एक्यूआई लेवल अधिक होने से सुबह टहलने से लाेगों की सेहत बिगड़ रही है, जिससे लोगों का टहलना कम हो गया है तो कुछ लोगों ने बंद कर दिया है। ठंड में टहलने वालों की सांस फूल रही है तो बीपी बढ़ जा रहा है। इसके अलावा ठंडी हवा के कारण कुछ को जोड़ों में दर्द होने लग रहे हैं। ठंडी हवा अंदर जाने से सांस व एलर्जी की दिक्कत भी बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट व श्वास विभाग में सांस और सीओपीडी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना करीब 200 से अधिक मरीज आ रहे हैं, इसमें करीब डेढ़ सौ अस्थमा और 60 सीओपीडी, एलर्जी के रहते हैं, जबकि इससे पहले करीब सौ मरीज इलाज के लिए आते थे। वहीं ठंड का असर बीपी, शुगर के मरीजों पर भी पड़ रहा हैं। थोड़ी सी लापरवाही से उनकी दिक्कत बढ़ जा रही है। मेडिसिन विभाग में भी हर रोज करीब सौ मरीज आ रहे हैं। मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सराजुद्दीन और चेस्ट व श्वांस विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनुराग शुक्ला ने बताया कि ठंड और प्रदूषण की वजह से सेहत पर असर पड़ता है। ठंड और कोहरे से सांस की नली सिकुड़ जाती है। इससे सांस के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। एलर्जी से पीड़ित को आंख से पानी, जलन, सांस फूलने की परेशानी बढ़ जाती है। अस्थमा के मरीज को रात में गले से सीटी की आवाज, सांस फूलती है। सीओपीजी के मरीज को भी दिक्कत होती है। ठंड से खून की धमनियां सिकुड़ती हैं। इससे ब्लड के बहाव का दबाव बढ़ जाता है। सामान्य मरीजों का भी बीपी बढ़ जाता है, जो मरीज हैं उनका बढ़ जाता है। लापरवाही से दिमाग की नसें फटने, हर्ट की नस में ब्लाकेज का खतरा रहता है। ऐसे में ठंड, धूल, धुआं से बचें, गर्म कपड़े से सिर से पैर तक ढक कर रखें, मास्क पहनें, तला, भुना, बाहर खुले में बिकने वाले सामान, घी के सेवन से परहेज करें।
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