देवरिया। शहर के अंसारी रोड पर लगी आग को बुझाने के लिए दमकल कर्मियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। दमकल की सात गाड़ियों ने करीब 125 फेरे लगाए। आग पर काबू पाने में लगभग पांच लाख लीटर पानी लगा। जब पानी कम पड़ने लगा तो दमकल कर्मियों ने नाले में उतर कर पानी का इंतजाम किया। आसपास के लोगों के मंगलवार रात से बुधवार शाम तक कुल 18 घंटे दहशत में बीते। आग के कारण मौके के पास स्थित दो स्कूलों को भी बंद कर दिया गया। पूरे रास्ते की पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी थी।
आग बुझाने के लिए 18 घंटे तक दमकल कर्मियों को पानी के इंतजाम और जाम से जूझना पड़ा। संकरी गली होने के कारण रात में दमकल वाहन को काफी दूर खड़ा करना पड़ा। जिस जगह पर आग लगी थी उसके पीछे और बगल से भी कोई रास्ता नहीं था। इसके कारण दमकल कर्मियों को दुकान का शटर तोड़ना पड़ा। बगल के मकानों पर चढ़कर पानी की बौछार करनी पड़ी। इन जगहों पर हाईड्रेंट पंप भी जमीन में दब चुके हैं। इसके कारण पानी के लिए काफी परेशानी हुई। पूरे अभियान के दौरान मौके पर सदर सीओ श्रीयश त्रिपाठी, कोतवाल दिनेश मिश्रा, अग्निशमन अधिकारी राजमंगल सिंह सहित 50 फायर कर्मी जुटे रहे। आग बुझने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
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दहशत के मारे घरों से बाहर निकल गए लोग
देवरिया। अंसारी रोड पर आग लगने की घटना से घनी बस्ती का इलाका अंसारी रोड, छहमुखी चौराहा, मालवीय रोड, तिलक रोड, सब्जी मंडी में दहशत का माहौल रहा। जिस जगह पर आग लगी वहां बगल के निवासी मुन्ना अंसारी बताते हैं कि पूरी रात जगा रहा। डर लगा रहा था कि आग फैल गई तो पूरा मोहल्ला चपेट में आ जाएगा। इसके कारण गैस सिलेंडर को पहले बाहर किया गया फिर हम लोग बाहर निकल कर डटे रहे। इसी तरह अन्य लोगों ने भी पूरी रात बाहर निकल कर रात गुजारी। रात का हाल यह रहा कि धुआं करीब दो साै मीटर के क्षेत्र में फैल गया था, इससे आधे शहर के लोग अनहोनी की घटना से सशंकित रहे।
सकरी गलियों में हैं कई गोदाम, किसी के पास नहीं है फायर एनओसी
देवरिया। जिस जगह पर आग लगी है वहां के आसपास का इलाका बाजार का है। हालत यह है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी को कदम-कदम पर जाम मिल रहा था। इससे चंद कदमों की दूरी पर छहमुखी चौराहा के इलाके में अगर इस तरह की वारदात होती तो दमकल की गाड़ी भी नहीं पहुंच पाती। सबसे गंभीर बात तो यह है कि शहर के रौनियारी मोहल्ला, पंजाबी गली, छहमुखी चौराहा, तिलक रोड, सुर्तीहट्टा, सब्जी मंडी, गल्ला मंडी, नई बाजार का इलाका भी घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर है। इन जगहों पर हजारों की संख्या में दुकान और गोदाम हैं। इसमें साड़ी, कपड़ा, प्लास्टिक के सामान मौजूद रहैं। इन गोदामों में अग्निशमन से एनओसी भी नहीं ली गई है। इतना ही नहीं जिस जगह पर आग लगी है वहां भी अग्निशमन यंत्र नहीं था और अन्य जगहों पर भी ऐसे हालत हैं।
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कोट :
- मेरी तो पूरी पूंजी ही डूब गई। जीवन भर की कमाई राख हो गई। करीब डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बिजली के शार्ट सर्किट से आग लगी है। पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
- उमेश बरनवाल
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- बगल में घर है। आग के कारण हम लोगों की सांसें अटक गईं थीं। पूरे परिवार ने सड़क पर रात गुजारी है। घर में भोजन तक नहीं बना। हमेशा डर सताता रहा कि कहीं मेरी मकान आग की चपेट में न आ जाए।
- मुन्ना अंसारी
- आग की घटना के बाद पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई थी। सभी को यही डर लग रहा था कि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो बगल के मकान भी चपेट में आ जाएंगे।
- संतोष वर्मा
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आग की घटना की जानकारी होने पर तुरंत मौके पर आया, क्योंकि मेरी भी दुकान और गोदाम कुछ दूरी पर हैं। अग्निशमन कर्मियों ने समय रहते आग को सीमित कर दिया और फैलने नहीं दिया, इसके कारण बड़ी घटना होने से बच गई।
- यशवीर सिंह जस्सी
आग पर 18 घंटे के प्रयास के बाद काबू पाया गया है। हाईड्रेंट पंप न होने के कारण पानी के लिए दिक्कत हुई है। संकरी गली होने के कारण परेशानी हुई है। बड़े और छोटे प्रतिष्ठान एनओसी नहीं ले रहे हैं और न ही आग से बचाव के यंत्र लगाते हैं। सील करने का अग्निशमन विभाग को अधिकार नहीं है, इसके कारण यह लापरवाही हो रही है।
- राजमंगल सिंह, अग्निशमन अधिकारी