परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल हाजिरी का विरोध सही या गलत पर अलग-अलग वर्ग के लोगों ने दी राय
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। डिजिटल हाजिरी व्यवस्था लागू करने के लिए पिछले छह माह से सरकार की ओर से तैयारियां चल रही थीं। शिक्षकों को टैबलेट व हर माह डाटा पर आने वाला खर्च भी दे दिया गया। शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नए सत्र में ग्रीष्मावकाश के बाद आठ जुलाई से जैसे ही इसे लागू करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जुटा, पूरे प्रदेश के परिषदीय शिक्षक इसके विरोध में खड़े हो गए।
शिक्षक वर्ग के आंदोलन को देखते हुए सरकार की ओर से इसे दो माह के लिए स्थगित कर दिया गया। शिक्षकों के इस विरोध ने व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को लेकर आम से लेकर खास लोगों को भी सोचने पर विवश कर दिया है। इसी मुद्दे को लेकर शिक्षा सहित अन्य वर्ग के लोगों से बातचीत की गई सबने पहले बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाने की बात कही।
-
डिजिटल हाजिरी की पहल अच्छी है, लेकिन सरकार को हर स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक पर्याप्त शिक्षक हो, इसकी व्यवस्था भी करें। दूरदराज के विद्यालय शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं। विद्यालयों में पर्याप्त कमरे तक नहीं हैं। जिस तरह केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों को 30 अर्जित अवकाश, 14 सीएल मिलते हैं, परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को भी मिलना चाहिए। विद्यालयों में डेस्क बेंच, चपरासी, शौचालय सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं भी देने की ओर से सोचना चाहिए।
.....डॉ.रामहजूर प्रसाद, पूर्व बीएसए व सेवानिवृत्त एडीआईओएस
डिजिटल हाजिरी का स्टंट भी सरकारी स्कूलों को बदनाम कर प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देने की प्रक्रिया का हिस्सा है। प्राइवेट स्कूलों को सभी तरह की लूट की छूट दे दी गई है जहां छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों के उत्पीड़न शोषण पर कोई लगाम नहीं लगाया जा रहा है। सरकारी विद्यालयों के इन्फ़्रास्ट्रक्चर सुधारने से लेकर शिक्षकों की भर्ती जैसी चीज़ों पर कोई ठोस काम करने की बजाय सरकार ऐसी चीज़ें लाकर असली सवालों को छिपा देना चाहती है। आंकड़े बताते हैं प्रदेश के आधे से ज़्यादा प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल एक या दो अध्यापकों के भरोसे चल रहे हैं। सबसे पहली ज़रूरत यह है कि सरकारी विद्यालयों में सभी विषय के अध्यापकों की पर्याप्त संख्या में भर्ती की जाए।
...डॉ.चतुरानन ओझा, सामाजिक चिंतक
-
प्राथमिक शिक्षा को सुधारने के लिए सरकार की ओर से सुधारात्मक प्रक्रिया के अंतर्गत ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था लाने की तैयारी है। हालांकि इसके पहले यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि अधिकांश स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। वहां न तो कुर्सी-मेज, डेस्क बेंच, स्वच्छ पेयजल, बिजली, पंखा, लाइब्रेरी तक नहीं है। पहले स्कूलों के प्रति शिक्षक का आकर्षण बढ़े इसके इंतजाम होने चाहिए। निजी स्कूलों में यह सारी व्यवस्थाएं होती है तो उनका प्रदर्शन भी अच्छा होता है।
...प्रो..नाजिश बानो, पूर्व विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान, संत विनोबा पीजी कॉलेज
सुधारात्मक प्रक्रिया अंतर्गत सरकार की यह अच्छी थी। इससे शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थी व शिक्षक सभी को को लाभ होता। लोकसभा चुनाव में आए नतीजों के चलते अब सरकार एक्शन मूड में नहीं है, इसलिए उसे शिक्षकों के आंदोलन के चलते इसे स्थगित करना पड़ा, क्योंकि शिक्षक वर्ग इससे नाराज हो रहा था और प्रदेश सरकार लोगों को नाखुश नहीं करना चाहती।
हालांकि यह व्यवस्था केवल शिक्षकों के साथ ही नहीं हर सरकारी कार्यालय में होना चाहिए।
....सतीश जायसवाल, अधिवक्ता