बरहज। अनंत आश्रम में बुधवार को योगिराज अनंत महाप्रभु के 247 वें जयंती के अवसर पर वैदिक मंगलाचरण के साथ समारोह का शुभारंभ किया गया। जिसमें छात्रों के अलावा नगर सहित दूर-दराज के लोग शामिल हुए। कथावाचक अनिल शास्त्री व मनमोहन शरण महाराज ने कहा कि त्रेता युग में स्वर्ण रुपी मृग के पीछे भागने पर भगवान राम को भी दुख का सामना करना पड़ा था।
जयंती समारोह के पहले दिन सासाराम-बिहार से आए कथावाचक अनिल शास्त्री और अवध धाम के मनमोहन शरण महाराज ने भक्तों को कथा का रसपान कराया। कथावाचकों ने कहा कि भागवत और रामकथा अमृतमयी है। जिसे सुनने के लिए देवता भी अधीर रहते हैं। इसको सुनने मात्र से जीवन धन्य हो जाता है। कथावाचकों ने कहा कि कलियुग में हर एक कोई स्वर्ण की चाहत में दिन-रात एक किए हुए है। मौके पर अनंत पीठ के पीठाधीश्वर आंजनेय दास, कृष्णमुरारी तिवारी, अंगद प्रसाद द्विवेदी, योगेंद्र पांडेय, बृजराज उपाध्याय, परशुराम पांडेय आदि ने भक्तों को कथा सुनाया। मौके पर बलभद्र त्रिपाठी, किरन पाठक, प्रेमशंकर पाठक, ओमप्रकाश शुक्ल, रवींद्र मिश्र आदि मौजूद रहे।