कहीं नर्क ना बन जाए दोआबा के दो लाख लोगों की जिंदगी
आवागमन रुका तो बरसात में टापू बन जाएंगे 52 गांव
संवाद न्यूज एजेंसी।
रुद्रपुर। तीन दिन से पिड़रा पुल के एप्रोच पर हो रहे कटान को रोकने के लिए जद्दोजहद कर रहे प्रशासन की लापरवाही से दोआबा के दो लाख लोगों की जिंदगी नर्क बन सकती है। यहां कटान रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग बोरी में मिट्टी डाल कर स्लैब बना रहा है, हालांकि मिट्टी के ढेर के सहारे कटान रोकना मुश्किल लग रहा। बरसात के पहले एप्रोच दुरुस्त नहीं हुआ तो दोआबा के 52 गांव टापू बन जाएंगे।
सोमवार की दोपहर पिड़रा पुल का एप्रोच धंसने से आवागमन बाधित हो गया। पुल से हल्के वाहन सहित पैदल लोगों की आवाजाही शुरु हो गई, लेकिन लोडेड वाहन ले जाने पर रोक लगी है। बीते वर्ष सितंबर माह में पुल का एप्रोच धंसने से आठ से बड़े वाहनों के आने-जाने पर रोक लगी है। चौराहे के व्यापारियों का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है, यहां व्यवसायियों को अतिरिक्त भाड़ा देकर सामानों को दुकान तक मंगाना पड़ रहा है। एक सप्ताह ही लोडेड वाहनों के चलने पर एप्रोच धंस गया। करीब दो करोड़ रुपये खर्च करने के बाद पिड़रा पुल का एप्रोच ठीक नहीं हो गया। एप्रोच में बंधों की सुरक्षा में लगे पेड़ की टहनिया भी बर्बाद कर दी गईं। गोर्रा नदी यू-टर्न लेकर सीधे पुल के खंभों पर ठोकर मार रही है। नदी के कटान को देख पिड़रा गांव के लोग भी दहशत में हैं। एप्रोच के आगे पिड़रा गांव की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है।
बोले दोआबावासी- बिना बोल्डर पिचिंग के नहीं बच पाएगा पुल का एप्रोच
पचलड़ी के व्यापारी ऋषिकेश सिंह ने कहा कि बिना बोल्डर पिचिंग के पुल के एप्रोच को बचाने के प्रयास किया जा रहा है। सरकारी धन से बोरी से मिट्टी डाल कर पुल बचाने का नहीं, बल्कि ठेकेदारों को कमाने का जरिया बताया जा रहा है। बीते साल दहशरा, दीपावली और छठ पूजा पर पुल से आवागमन नहीं होने पर व्यापारी प्रभावित रहा। इस बार लग्न में बड़ी गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगने से नुकसान हो रहा है।
व्यापारी चंद्रप्रकाश सिंह ने कहा कि पुल का एप्रोच दरकने से अक्सर आवागमन बंद हो जा रहा है। दोआबा के लोगों को गेहूं क्रय केंद्रों तक पहुंचाने में दिक्कते आ रही है। करीब चालीस किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर लोडेड वाहन अन्य जिलों को जा रहे है, जिससे व्यापारियों को अधिक ढुलाई देनी पड़ रही है।