...फोटो समाचार
पिछले तीन वर्षों में तीन गुनी हो गई संख्या, शहर के प्रमुख चौराहों पर बढ़ी है संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर में ई-रिक्शा चालकों के लिए छह माह पूर्व गाइडलाइन बनी थी। हालांकि, यातायात पुलिस इसका पालन नहीं करा पा रही है। इनकी मनमानी बढ़ने से ये हर चौक-चौराहे पर जाम की बड़ी समस्या बन रहे हैं।
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर ई-रिक्शा के संचालन से जहां दो से तीन किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले यात्रियों की राह आसान की। वहीं, इनकी बढ़ती संख्या अब शहरवासियों को जाम की समस्या से भी हर दिन दो-चार करा रही है।
नगर पालिका प्रशासन की ओर से छह माह पूर्व इनके खड़े होने का स्थान, लेन में चलने का नियम बनाया गया गया था। हालांकि, इनका पालन कराने में जिम्मेदार पिछड़ जा रहे हैं। ये कब अचानक आ जाएंगे, कोई नहीं कह सकता। मनमानी से कई बार ये दुर्घटना के लिए भी जिम्मेदार बन रहे हैं।
मंगलवार की दोपहर 1:10 बजे रोडवेज के प्रथम गेट पर कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। यातायात पुलिस के खड़े होने के बावजूद कई ऐसे चालक मिले, जिनके वाहन में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगी थी। कई तो बिना नंबर के ही संचालित हो रहे थे। बस के रुकने के पहले ही चालक अपने वाहन गेट के पास लगा दे रहे थे। रोडवेज के अंदर जाकर ये बिना रोक-टोक के धड़ल्ले से सवारी भर रहे थे।
दोपहर 2:00 बजे कोऑपरेटिव चौराहे पर भी इन चालकों की मनमानी से कई बार जाम की स्थिति बनती दिखी। भटवलिया चौराहे पर 2:15 बजे दिखा कि चालकों को नियमों की बिल्कुल परवाह नहीं हैं। उन्हें दूसरे चालकों को पछाड़कर सिर्फ सवारी भरने से मतलब है। खास बात यह कि इन सभी जगहों पर पुलिस केवल तमाशबीन बनी थी।
हर वर्ष बढ़ती जा रही इन वाहनों की संख्या
वर्ष 2020 में परिवहन विभाग में 462, वर्ष 2021 में 832, वर्ष 2022 में 2133, वर्ष 2023 में 3236 ई-रिक्शा का पंजीयन हुआ है। पिछले पांच वर्षों के अंदर इनकी संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। विभाग में इनका पंजीयन भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
चोरी की बिजली से करते हैं चार्ज
ई-रिक्शा चालक बिजली की खपत बढ़ाने में भी बड़ा कारण बन रहे हैं। हालांकि, रात में अधिकांश लोग चोरी की बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे पकड़ पाने में बिजली निगम के अधिकारी भी सफल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में राजस्व को बड़ी क्षति पहुंचाने के भी यह वाहक बन रहे हैं।
स्पीकअप
कब ई-रिक्शा पीछे से आ जाएगा। इसका पता ही नहीं चलता। शहर में एक समय ये सहूलियत के साधन बने, लेकिन इनकी बढ़ती संख्या अब जाम का प्रमुख कारण बनती जा रही है। इनकी संख्या निर्धारित करने की जरूरत है।
-अवनीश यादव, उमानगर
शहर में बाइक से ज्यादा ई-रिक्शा वाले दिख रहे हैं। सिविल लाइंस, भटवलिया, कोऑपरेटिव चौराहा, मालवीय रोड में इनकी संख्या दो सालों में काफी बढ़ गई है। इससे शहरवासियों को हर रोज जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
-विकास कुशवाहा, देवरिया खास
संगठन की ओर से चालकों को किया जाता है जागरूक
ई-रिक्शा चालक कल्याण समिति के संरक्षक अमित मोदनवाल ने बताया कि संगठन से जुड़े चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जाता है। शराब पीकर और नाबालिग के गाड़ी चलाने पर पुलिस को उन पर कार्रवाई करनी चाहिए। पहले इनकी संख्या कम थी, अब बिहार सहित अन्य बाहरी जगहों से आ जाने से जाम की समस्या बढ़ रही है।
कोट
ई-रिक्शा के संचालन के लिए कोई रोक-टोक नहीं है। जो खरीदेगा उसका पंजीयन होगा ही। जांच के दौरान बिना नंबर, फिटनेस, टैक्स, डीएल नहीं मिलने पर इनके चालकों के खिलाफ कार्रवाई हर माह की जाती है।
-आशुतोष शुक्ला, एआरटीओ
कोट
सात से 13 फरवरी तक अभियान चलाकर ई-रिक्शा चालकों का डीएल, वाहन का फिटनेस आदि की जांच की गई है। 200 से अधिक वाहनों का चालान किया गया है। शहर में एक-एक व्यक्ति के नाम से कई ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। इन लोगों ने बिहार सहित अन्य जनपदों के लोगों को यहां चलाने को दे दिया है। कार्रवाई के दौरान ये बातें पता चल रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिनके पास डीएल है और वाहन पंजीकृत व फिटनेस से परिपूर्ण हो, वही चलें। ऐसा नहीं होने पर आगे भी जुर्माने की कार्रवाई चलती रहेगी।
-भूपेंद्र सिंह, टीएसआई