दुग्धेश्वरनाथ मंदिर के गर्भगृह में जलाभिषेक करते श्रद्धालुफोटो क्रेडिट संवाद
सावन के दूसरे पखवारे में रोज उमड़ रही शिवभक्तों की भीड़, सुबह से शाम तक चल रहा रुद्राभिषेक
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। पुरुषोत्तम मास के बाद शुरू श्रावण मास का दूसरा पखवारा शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व का पखवारा है। इस पखवारे में पौराणिक महत्व के दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। महाकाल के सदृश्य दुग्धेश्वरनाथ का जलाभिषेक करने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु आ रहे हैं। सावन के आखिरी पखवारे में मंदिर में सुबह से शाम तक रुद्राभिषेक चल रहा है।
रविवार को मंदिर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अहले सुबह चार बजे से ही शुरू जलाभिषेक के दौरान हर हर महादेव के जयघोष से मंदिर परिक्षेत्र गूंजने लगा। रुद्रपुर का दुग्धेश्वरनाथ धाम हंस तीर्थ स्थल कहा जाता है। इस का उल्लेख पद्मपुराण में किया गया है। अष्टकोण बने मंदिर में शिवलिंग सामान्य धरातल से 22 फीट नीचे है। यह स्वयंभू महादेव है। अर्थात शिवलिंग धरती से अपने आप प्रकट हुआ है। लोगों की मान्यता के अनुसार भगवान शिव पातालगामी है। इनकी गहराई का अब तक पता नहीं लग पाया है। पूंर्वांचल सहित देश के वि्भिन्न प्रदेशों से शिवभक्त यहां जप और अनुष्ठान करने आते हैं। दो माह के पुरुषोतत्तम और श्रावण मास में देश के कोने से शिवभक्त दुग्धेश्वरनाथ धाम में आ रहे है। मंदिर के महंथ विजय शंकर ने कहा कि श्रद्धालुओं की भीड़ साल दर साल बढ़ती जा रही है। मंदिर पर दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने और भंडारा का इंतजाम किया गया है।