देवरिया। महायोजना-2031 के प्रस्तावित कार्यों को दिसंबर माह में ही धरातल पर उतर जाना चाहिए था पर एजेंसी और अफसरों की सुस्ती के कारण यह नौ माह देर हो गई है। अभी नगर विकास मंत्रालय में मंजूरी के लिए फाइल अटकी हुई है। इसका असर यह है कि शहर के विकास की रफ्तार मंद पड़ गई है। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। कई भवनों के नक्शे पास नहीं हो रहे हैं। वहीं, विभागीय मिलीभगत से खेल भी चल रहा है। बिचौलियों के जरिए अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।
विनियमित क्षेत्र की महायोजना-2031 दिसंबर 2022 में ही लागू हो जानी थी। इसकी खामियों को दूर करने के लिए जून 2022 में आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। करीब 532 लोगों ने अपनी-अपनी बात रखी। इस पर नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में जिलाधिकारी की कमेटी ने आपत्तियों और सुझावों को सुनकर एजेंसी को नए तरीके से मानचित्र सहित अन्य कार्य करने के लिए सौंप दिया। पर इसके बाद भी एजेंसी की लापरवाही के कारण योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन को पत्र भेजा था। तब जाकर मई माह में जिलास्तरीय बैठक हुई और प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके बाद नगर विकास मंत्रालय को भेज दिया गया। एक बार फिर से करीब चार माह से नगर विकास मंत्रालय के पास फाइल अटकी हुई है। महायोजना कब धरातल पर उतरेगी इसकी जानकारी नियत प्राधिकारी कार्यालय को भी नहीं हो पर रही है।
ये काम होने हैं
देवरिया। महायोजना में बैतालपुर से रुद्रपुर जाने वाले मार्ग तक और बैतालपुर से कसया मार्ग तक दो बाईपास सड़कों का निर्माण कराया जाना है। इसमें 34 से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण, नए पार्कों, आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक भवन, औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाना है।
नक्शे नहीं हो पा रहे मंजूर
देवरिया। महायोजना के चक्कर में लोगों को दिक्कतों का सामना करन पड़ रहा है। कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर हरित क्षेत्र, व्यवसायिक, गोदाम और अन्य कार्य के लिए भूमि के उपयोग का प्रस्ताव है। इसके कारण पहले से भूमि लेने वालों के भी मानचित्र स्वीकृत नहीं हो रहे हैं। इस वजह से लोग घर नहीं बना पा रहे हैं।
विभागीय मिली भगत से हो रहा है अवैध निर्माण, नोटिस देकर साध लेते चुप्पी
देवरिया। महायोजना को लेकर जिम्मेदार कई क्षेत्रों में मानचित्र पास नहीं कर रहे हैं। पर हकीकत हो यह है कि कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना मानचित्र के भवन का निर्माण किया जा रहा है। यहां तक की बाढ़ग्रस्त इलाके में बिना नक्शा भवन निर्माण कराया गया है। विभाग के कर्मचारी जब मौके पर जाते हैं तो नाम पता पूछकर चले आते हैं। इसके बाद नोटिस भेजकर बैठक जाते है। करीब 150 से अधिक लोगों को अवैध निर्माण का नोटिस भेजा गया है। इतना ही नहीं, कुर्ना नाला की भूमि पर पंद्रह ऐसे लोगों ने भवन निर्माण करा लिया है। जो नियमों की अनदेखी है।
महायोजना के प्रस्तावों को जिले से मंजूरी मिल गई है। अब शासन को भेजा गया है। एजेंसी की लापरवाही के कारण देरी हुई है। प्रयास है कि जल्द से महायोजना को लागू कराया जाए। जहां पर आवासीय क्षेत्र है वहां पर मानचित्र पास कराने में कोई दिक्कत नहीं है।
- योगेंद्र कुमार, नियत प्राधिकारी, देवरिया