संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में गर्भवती एक असहाय महिला का ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने उसकी जान बचाई। इसमें देरी होने पर महिला की जान भी जा सकती थी। लेकिन, पूरी तरह विकास न होने के कारण बच्चे को नहीं बचाया जा सका। प्राचार्य ने एनेस्थीसिया देकर ऑपरेशन कराया।
भाटपाररानी की गर्भवती एक महिला बृहस्पतिवार को दिन के ढाई बजे के बाद गंभीर हालत में महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल एंबुलेंस से पहुंची। महिला के पास प्राइवेट में कराए गए अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट थी। कर्मचारियों ने उसे लेबर रूम पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने परीक्षण किया तो गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कन बहुत कम थी। महिला की हालत गंभीर थी। पांच साल पहले उसे ऑपरेशन से बच्चा हुआ था। पेट पर टांके के स्थान पर दर्द भी हो रहा था। कंसलटेंट को जानकारी दी गई।
डॉक्टरों की टीम ने महिला की जान बचाने के लिए ऑपरेशन का निर्णय लिया। मरीज के साथ मात्र पांच साल के बच्चा के अलावा कोई अभिभावक नहीं था। ऑपरेशन के लिए सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर करने वाला कोई नहीं था और बेहोशी के डॉक्टर भी नहीं थे। इसके बाद सूचना सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा को दी गई। उन्होंने प्राचार्य डॉ. राजेश बरनवाल, डीएम अखंड प्रताप सिंह और एडीएम प्रशासन गौरव से वार्ता की। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई।
प्राचार्य ने बताया कि महिला गंभीर हालत में पहुंची। डॉक्टरों ने परीक्षण किया तो ऑपरेशन जरूरी था। सीएमएस ने प्राचार्य व प्रशासन से बात की और व्यवस्था की। प्राचार्य खुद मरीज को एनेस्थीसिया देने को तैयार हो गए। सीएमएस ने वन स्टाफ सेंटर की काउंसलर और स्टाफ नर्स को बुलाया। इसके बाद ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई गई। बच्चे का ठीक से विकास न होने के कारण मृत पैदा हुआ। उसे मोर्चरी में रखा गया है। परिजनों के न आने पर पुलिस को सूचना दी गई है।
सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी। ऑपरेशन करना जरूरी था। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई। बच्चा मृत पैदा हुआ था। परिजनों के न आने पर पुलिस को सूचना दी गई है।