मझौलीराज नगर पंचायत में लोकायुक्त की जांच के बाद मिली थी अनियमितता सबसे ज्यादा आरसीसी सड़क निर्माण में 12.76 लाख, स्पीड ब्रेकर में 5.63 लाख व डीजल में 1.32 लाख का गबन मिला
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। नगर पंचायत मझौलीराज में 18.61 लाख से अधिक रुपये के गोलमाल के मामले में लोकायुक्त टीम की जांच के बाद डीएम ने कोतवाली पुलिस से बिंदुवार जांच रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलते ही पुलिस जांच आख्या रिपोर्ट जुटाने में जुट गई है। शनिवार को शिकायतकर्ता भाजपा नेता रामध्यान पटेल से कोतवाली पुलिस ने मामले से जुड़ी जानकारी ली।
23 फरवरी को डीएम ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर पूरे मामले में हुए घोटाले के कागजात उपलब्ध कराने व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा है। जांच में 18.61 लाख रुपये का घोटाला साबित हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा आरसीसी, इंटरलॉकिंग रोड निर्माण में 12.76 लाख स्पीड ब्रेकर बनवाने में 5.63 लाख व पेट्रोल डीजल, मिट्टी तेल के अपव्यय व नियम विरुद्ध भुगतान में 1.32 लाख का गबन सिद्ध हुआ है।
जांच जिला लेखा परीक्षा अधिकारी व स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग ने की है। पुलिस पूरे मामले को नए सिरे से संज्ञान में लेकर पत्रावली जुटाकर कर दोषियों का खाका तैयार करने में लग गई है। कोतवाल गोपाल पांडेय ने बताया कि उन्होंने शनिवार को ही कार्यभार ग्रहण किया है। मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। फाइल देखने के बाद दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ईओ, सेवानिवृत्त जेई और लेखा लिपिक के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई
सलेमपुर। नगर पंचायत मझौलीराज मे 18.61 लाख रुपये गबन की पुष्टि होने के बाद निवर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर गुप्ता के अलावा ईओ पंकज कुमार, सेवानिवृत्त जेई विंध्याचल गुप्ता और सेवानिवृत्त लेखा लिपिक भी जांच के घेरे में आए हैं।
आरोपी ईओ के पास है तीन नगर पंचायतों की जिम्मेदारी
सलेमपुर। नगर पंचायत मझौलीराज के आरोपित ईओ पंकज कुमार के जिम्मे इस समय नगर पंचायत सलेमपुर और तरकुलवा नगर पंचायत की भी जिम्मेदारी है। इसको लेकर आमजन के बीच अब अंगुली उठने लगी है। लोगों में चर्चा है कि यहां के अलावा उन नगर पंचायतों की भी अगर जांच हो तो अनियमितता मिल सकती है।
ईओ ने खुद दर्ज कराया था अध्यक्ष पर मुकदमा
सलेमपुर। लोकायुक्त की जांच के बाद ईओ पंकज कुमार ने अक्तूबर 2021 में तत्कालीन अध्यक्ष गौरीशंकर गुप्ता पर कोतवाली सलेमपुर में गबन का मुकदमा दर्ज कराया था। अब इनके ही मुकदमे के आधार पर जब लोकायुक्त द्वारा गठित टीम ने विस्तृत जांच की तो ये खुद लपेटे में आ गए हैं। इनके अलावा सेवानिवृत्त जेई तथा वर्तमान में संविदा पर कार्य कर रहे सेवानिवृत्त लिपिक ओम प्रकाश भी फंसते नजर आ रहे हैं। संवाद