मेडिकल कॉलेज : किडनी की समस्या के मरीज अधिक होने के कारण कम पड़ रहे बेड
प्राइवेट में डायलिसिस के लिए 2500 खर्च कर रहे रोगी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में किडनी की समस्या वाले रोगियों को डायलिसिस कराने के लिए दस दिन पहले नंबर लगाना पड़ रहा है। जो यहां डायलिसिस करा भी रहा है उसे खून बढ़ाने के लिए करीब चार सौ रुपये का इंजेक्शन खरीद कर लाना पड़ रहा है। जिन रोगियों को नंबर नहीं मिल रहा है उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में 2500 रुपये खर्च कर डायलिसिस कराना पड़ रहा है।
एक रुपये की पर्ची पर महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस कराने का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। इंफेक्शन से बचने के लिए मरीजों को डायलिसिस से जुड़े करीब तीन सौ रुपये के उपकरण को बाजार से खरीद कर लाना पड़ रहा है। ब्लड बढ़ाने के लिए चार सौ रुपये का एक इंजेक्शन भी अपने पास मंगाना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस करा रहे लार नगर के हृदयानंद सिंह और परसिया मिश्र के एक युवक ने बताया कि एक बार के डायलिसिस में सात से आठ सौ रुपये खर्च करना पड़ रहा है। इन सुविधाओं को भी मुहैया कराया जाना चाहिए।
किडनी रोगियों की बढ़ती संख्या की वजह से 18 बेड के डायलिसिस सेंटर से लोगों को लौटना पड़ रहा है। यहां तीन शिफ्ट में 54 रोगियों की डायलिसिस हो रही है। इसके बावजूद आने वाले नए रोगियों को आठ से दस दिन इंतजार करना पड़ रहा है। उधर, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि डायलिसिस से जुड़ी सभी सुविधाएं व दवाएं उपलब्ध हैं।
हेपेटाइसिस सी से पीड़ित मरीज बढ़े
जिले में हेपेटाइसिस सी का भी प्रकोप बढ़ रहा है। इसका असर किडनी पर पड़ रहा है, जिससे लोगों को डायलिसिस करानी पड़ रही है। इस बीमारी की चपेट में आने वालों में युवा अधिक हैं। इंफेक्शन फैलने के डर से इनका बेड अलग केबिन में लगाया गया है। हर रोज नौ रोगियों की डायलिसिस होती है।
डायलिसिस सेंटर पर सुविधाएं हैं। शुरू में आठ बेड था। जरूरत पड़ने पर उसे बढ़ाया गया है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेड बढ़ाने की प्रक्रिया की जाएगी। -डॉ.एचके मिश्रा, सीएमएस