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Deoria News: मंदिर के नए महंत को गद्दी पर बैठाए जाने से प्रशासन ने रोका

Wed, 21 Feb 2024 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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महुआडीह थानाक्षेत्र के हेतिमपुर कस्बा स्थित प्राचीन राम जानकी मंदिर का मामला
ब्रह्मलीन महंत की तेरही के दिन नया महंत बनाने की है परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। हेतिमपुर कस्बा स्थित प्राचीन राम जानकी मंदिर पर मंगलवार को नए महंत को गद्दी पर बैठाए जाने के प्रयास के बीच ऐन वक्त पर पहुंचकर प्रशासन ने रोक दिया। दोनों दावेदार शिष्यों को चेतावनी दी गई कि जब तक न्यायालय का फैसला नहीं आ जाता है, तब तक यथास्थिति बनाए रखें। इस बात से मंदिर परिसर में घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। बाद में दोनों पक्षों ने प्रशासन की बात को मान ली।
महुआडीह थानाक्षेत्र के हेतिमपुर कस्बा स्थित एक प्राचीन राम जानकी मंदिर है। कुछ वर्षों से यहां परंपरा रही है कि महंत के निधन के बाद उनकी तेरही के दिन उनके शिष्यों में से ही किसी योग्य शिष्य को नए महंत की गद्दी पर बैठाया जाता है।
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मंदिर के महंत रहे रामसेवक दास के ब्रह्मलीन होने के बाद उनके शिष्य खदेरू दास को स्थानीय लोगों ने महंत घोषित कर गद्दी पर बैठा दिया। दूसरे शिष्य सियाराम दास ने खदेरू दास को महंत बनाए जाने का विरोध कर दीवानी न्यायालय में वाद दाखिल कर दिया। न्यायालय में मामला अभी चल ही रहा था कि लंबी उम्र पूरी करने के बाद खदेरू दास भी ब्रह्मलीन हो गए।
मंदिर परिसर में मंगलवार को उनकी तेरही मनाई जा रही थी। कुछ लोगों ने तेरही के दिन खदेरू दास के शिष्य सीताराम त्यागी को महंत के रूप में गद्दी बैठाने की तैयारी कर ली थी। उधर, सियाराम ने मामले को लेकर डीएम अखंड प्रताप सिंह से शिकायत की। उनकी मांग है कि न्यायालय का आदेश आने तक किसी को महंत घोषित न किया जाए। डीएम के आदेश पर नायब तहसीलदार यदुवंश यादव मंगलवार को अपनी टीम और पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने सीताराम त्यागी को गद्दी पर आसीन कराए जाने के कार्य को न्यायालय से निस्तारण होने तक के लिए रोक दिया। दोनों पक्षों से कहा कि किसी को पूजा-पाठ करने की मनाही नहीं है। इससे मंदिर परिसर में दोनों पक्षों में असहज स्थिति पैदा हो गई। बाद में दोनों पक्ष उनकी बात मान गए।

पुरानी परंपरा का टूटना, बना विवाद का वजह
हेतिमपुर कस्बा स्थित यह राम जानकी मंदिर प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा है। इसकी एक शाखा गोरखपुर जिले के बड़हलगंज में भी है। हेतिमपुर मंदिर के पूर्व महंत सरजूदास से पहले यहां जो भी पुजारी होते, अपने जीते हुए उत्तराधिकारी घोषित कर देते थे। लेकिन, सरजूदास ने परंपरा का निर्वहन नहीं किया। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद रामसेवक दास उनकी तेरही के दिन स्थानीय लोगों के सहयोग से महंत की गद्दी पर बैठ गए। उनके भी ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी तेरही के दिन खदेरू दास महंत की गद्दी पर बैठे। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
इसलिए पहुंचे अधिकारी
मंदिर के ब्रह्मलीन महंत की गद्दी को लेकर सियाराम दास ने पहले ही दीवानी न्यायालय में आपत्ति दाखिल किया है। अभी मामले का निस्तारण नहीं हुआ है। परंपरा के अनुसार, महंत खदेरू दास के निधन के बाद मंगलवार को उनके शिष्य सीताराम त्यागी को नया महंत घोषित किया जाना था। सियाराम दास ने डीएम को पत्र देकर मामले का निस्तारण होने तक गद्दी सौंपने की प्रक्रिया रोकने की मांग की।
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कोट-
डीएम के निर्देश पर मैंने मौके पर जाकर दोनों पक्षों को यथास्थित बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। पूजा पर कोई रोक नहीं है। दोनों पक्ष मान गए हैं। कोई विवाद नहीं है।
-यदुवंश यादव, नायब तहसीलदार
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