देसही देवरिया। विक्रम विशुनपुर गांव स्थित पीएचसी पर शनिवार को डॉक्टर और फार्मासिस्ट नदारद रहे। वार्ड ब्वाय पर्ची बनाकर मरीजों का इलाज करते मिले। स्वीपर दवा वितरण कर रहे था। यहां डाक्टरों की अनुपस्थिति से मरीजों का आना भी कम हो गया है।
सरकार गांव के लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराने का चाहे जितना दावा कर ले। लेकिन, जमीनी सच्चाई अलग ही है। बैतालपुर विकास खंड क्षेत्र के विक्रम विशुनपुर गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर शनिवार को नजारा हैरान करने वाला था। प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅक्टर कालिका प्रसाद गुप्ता और फार्मासिस्ट शैलेंद्र कुमार उपाध्याय नहीं आए थे। इलाज कराने आए सोनिया, रामभवन, प्रियेश यादव, आर्यन गुप्ता, रामलक्षन आदि मरीजों का वार्ड ब्वाय मोहम्मद शमशेर इलाज पर्ची बनाकर इलाज करते मिले। वहीं, स्वीपर/चौकीदार राजू मरीजों के बीच दवा वितरण कर रहे थे। मरीजों को कहा जा रहा था कि कुछ दवा उपलब्ध नहीं है। बाद में आकर ले लीजिएगा।
मरीजों के स्वास्थ्य और जान की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों की यह संवेदनहीनता वास्तव में हैरान करने वाली थी। यहां तैनात शेष स्वास्थ्यकर्मी नदारद थे। मुहम्मद शमशेर ने बताया कि प्रभारी के अलावा यहां 1 फार्मासिस्ट, 1 वार्ड ब्वाय, 1 एसएलए, 1 स्टाफ नर्स और 1 स्वीपर सहित कुल छह स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती है। औसतन 30 मरीज रोजाना पहुंचते हैं। पूछने पर यह भी बताया कि कुछ जरूरी दवाएं नहीं हैं, अगले हफ्ते आएंगी।
स्वास्थ्य केंद्र पर बिजली तो है। मगर, फ्रिज नहीं है। महिला वार्ड का बेड भी टूटा और उखड़ा मिला। जंगले और आलमारियों का भी खस्ताहाल है। समय से इलाज के लिए मरीजों को विवश होकर करीब 25 किलोमीटर दूर जिले पर जाना पड़ रहा है।
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कोट
डाक्टर और फार्मासिस्ट के एक साथ मौजूद नहीं रहने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। मामला संज्ञान में आया है तो उसकी जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री आरोग्य मेला को लेकर कुछ अनुपस्थिति हो सकती है। फिलहाल स्वास्थ्य केंद्र पर डाक्टर का होना आवश्यक है।
-डॉ. राजेश कुमार झा, सीएमओ, देवरिया