खुखुंदू। क्षेत्र के ढाई सौ गांवों को दिन में नहीं के बराबर बिजली मिल रही है। जबकि रात में भी एमरजेंसी में कई बार रोस्टिंग कटौती की जा रही है। नतीजा इस उमसभरी गर्मी में उपभोक्ता परेशान हो जा रहे है। लेकिन निगम के जिम्मेदार कटौती पर ध्यान नहीं दे रहे है। निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि दिन में रोस्टिंग कटौती के चलते बिजली नहीं मिल रही है। रात में भी एमरजेंसी रोस्टिंग कटौती के चलते आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
विद्युत उपकेंद्र खुखुंदू में चार फीडरों के माध्यम खुखुंदू, मुसैला, बड़हरा, परसिया भंडारी, बीरपुर मिश्र, बैरौना, परसिया मिश्र, बारीपुर, नूनखार, सिसई, बरसाथ, एकडंगा कस्बों समेत ढाई सौ गांवों में विद्युत आपूर्ति की जाती है। हालात यह है कि दिनभर रोस्टिंग कटौती तो रात में फाल्ट ठीक करने और फिर एमरजेंसी में रोस्टिंग कटौती का सिलसिला जारी है। ऐसे में घरों और प्रतिष्ठानों तथा सरकारी दफ्तरों में लगे बिजली उपकरण भी जवाब दे जा रहे है। जैसे-जैसे उमसभरी गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे ही बिजली कटौती में भी बढ़ोतरी होते जा रही है।
किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से मोटर और नलकूपों से धान की फसलों में पानी चलाकर पौधों को जिलाया जा रहा है। हालांकि बिजली बहुत कम मिलने से पानी भी ठीक से नहीं चल पा रहा है। किसानों और उपभोक्ताओं ने आवश्यकता से अधिक हो रही कटौती पर अंकुश लगाने के लिए उच्चाधिकारियों से मांग की है। जबकि जिम्मेदार कह रहे है कि रोस्टिंग कटौती से आपूर्ति प्रभावित हुई है। स्थानीय स्तर से कटौती नहीं की जा रही है।
जेई सोनू कुमार ने बताया कि दिन में 6 और रात में एमरजेंसी रोस्टिंग कटौती की जा रही है। उपकेंद्र को जितनी बिजली मिल रही है, उतना उपभोक्ताओं को बिजली दी जा रही है। रही बात लोकल फाल्ट ठीक करने की तो उसे रोस्टिंग कटौती के दौरान ठीक किया जा रहा है।