करीब दो महीने पहले बकरी के काटने से बीमार 12 साल के किशोर की मंगलवार रात गोरखपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। पांच दिन पहले तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि जिस बकरी ने बच्चे को काटा था, उसे तीन महीने पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था और एक महीने बाद बकरी की मौत हो गई। डॉक्टरों का मानना है कि बच्चे की मौत की वजह रैबीज हो सकती है।
खुखुंदू थाना क्षेत्र के भलुआ गांव निवासी हिमांशु कुमार (12) पुत्र रामभरोसा राजभर बतरौली में एक निजी स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ता था। बताया जा रहा है कि उसके घर पर एक बकरी थी, जिसे करीब तीन महीने पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। एक दिन चारा खिलाते समय बकरी ने हिमांशु की हथेली में अपने दांत गड़ा दिए थे। कुत्ते के काटने के करीब एक महीने के भीतर बकरी की मौत हो गई। उधर, बकरी के काटने के बाद हिमांशु की भी तबीयत बिगड़ गई। अक्सर अनाप-शनाप बोलने लगता और उग्र हो जाता। हालांकि कुछ समय बाद वह शांत हो जाता। इसी दौरान एक दिन हिमांशु ने अपनी मां मां राधिका देवी और बड़े भाई राज (15) को भी दांत गड़ा दिया था।
पांच दिन पहले हिमांशु की तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई तो परिजन उसे लेकर मेडिकल कॉलेज देवरिया पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डाॅक्टर ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। हालांकि परिजन मेडिकल कॉलेज की बजाय एक निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान मंगलवार रात बच्चे की मौत हो गई।
हिमांशु की मौत को लेकर घरवालों का कहना है कि उसे पीलिया हो गया था, जिस कारण उसकी हालत बिगड़ गई थी। वे रैबीज की बात से इनकार कर रहे हैं। वहीं डाॅक्टर रैबीज की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने राधिका और राज को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी है। हालांकि राधिका और राज अभी बिलकुल स्वस्थ हैं।
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कुत्ते के काटने से बकरी में रैबीज का लक्षण हो गया होगा। बकरी ने जब बच्चे को काटा तो उसे भी रैबीज हो गया होगा। रैबीज धीरे-धीरे फैलता है। उसका लक्षण कुछ दिन बाद आता हैं। कुत्ता या अन्य जानवर के काटने पर डॉक्टर से संपर्क कर शीघ्र एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए। बच्चे ने अपनी मां और भाई को भी काटा है, तो उन पर भी इसका असर हो सकता है। उन्हें तत्काल एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए।
डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस