पुलिस भर्ती के लिए दौड़ का अभ्यास कर रहे 17 साल के छात्र को मंगलवार सुबह डायल 108 एंबुलेंस ने ठोकर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद एंबुलेंस चालक किशोर को लेकर सीएचसी पथरदेवा पहुंचा, लेकिन आरोप है कि वहां इलाज के अभाव में छात्र दो घंटे तक तड़पता रहा। इसके बाद उसे जिला अस्पताल और वहां से गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने मरीज के पहुंचते ही प्राथमिक उपचार किया और हालत गंभीर होने के कारण रेफर कर दिया। उन्होंने मृतक के परिजनों पर मारपीट और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर भी दी है। पुलिस ने फिलहाल केस दर्ज नहीं किया है।
बघौचघाट थाना क्षेत्र के बघौचघाट टोला अमरपुर निवासी शेषनाथ यादव का इकलौता पुत्र विकेश (17) हरियाणा में पॉलिटेक्निक तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। इसके साथ ही वह पुलिस भर्ती की तैयारी भी कर रहा था। रक्षाबंधन पर वह गांव आया था। पुलिस भर्ती के लिए दौड़ की तैयारी करने के लिए वह रोज सुबह सड़क पर दौड़ने जाता था। मंगलवार सुबह भी मलसी-बघौचघाट मार्ग पर दौड़ लगाने के बाद सड़क किनारे बैठ कर आराम कर रहा था। इस दौरान मलसी की तरफ से बघौचघाट जा रही डायल 108 एंबुलेंस ने उसे ठोकर मार दी। एम्बुलेंस की ठोकर से विकेश गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि ठोकर से विकेश की कमर की हड्डी टूट गई। इसके बाद एंबुलेस चालक उसे लेकर सीएचसी पथरदेवा पहुंचा।
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विकेश के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में दो घंटे तक इलाज नहीं मिलने से विकेश तड़पता रहा, जिससे उसकी हालत गंभीर होती गई। बाद में फार्मासिस्ट ने दवा दी और विकेश को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। देर शाम छात्र का शव घर पहुंचने पर परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
डॉक्टरों ने आरोप को झूठा बतायापरिजनों का आरोप है कि सीएचसी पर दो घंटे तक इलाज के अभाव में विकेश तड़पता रहा। इमरजेंसी में डॉक्टर और फार्मासिस्ट थे, लेकिन मरीज के इलाज में लेटलतीफी की गई। दो घंटे बाद उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। दूसरी तरफ इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर सुनील सिंह ने परिजनों के आरोपों को झूठा करार दिया है। उनका कहना है कि जैसे ही छात्र अस्पताल पहुंचा उसका प्राथमिक इलाज किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे रेफर कर दिया गया। डॉक्टर का कहना है कि छात्र के परिजन अस्पताल पहुंचने के बाद से ही हंगामा करने लगे थे। वे दुर्घटना करने वाली एंबुलेंस के चालक को बुलाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार भी किया। इसकी तहरीर डॉक्टर ने पुलिस को दी है। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी प्रभात रंजन ने भी परिजनों पर मारपीट और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।