बरहज। सरयू रविवार को खतरे के निशान 66.50 से डेढ़ मीटर ऊपर 68.00 मीटर पर बहने लगी है। नदी इस वर्ष सर्वोच्च सीमा पर पहुंच गई है। सरयू में सैलाब उमड़ने से बाढ़ का पानी रुद्रपुर और रामजानकी मार्ग तक पहुंच गया है। जिससे तटवर्ती गांवों के लोगों में खलबली है।
सरयू में सैलाब उमड़ आया है। जिससे पिछले करीब एक सप्ताह से नदी लगातार बढ़त बना रही है। थाना घाट पर बने मीटर गेज पर जलस्तर में रोजाना करीब 10-15 सेमी का इजाफा दर्ज किया जा रहा है। सरयू के उफनाने से राप्ती में भी बाढ़ आ गई है। नदी का पानी खेतों के रास्ते रिहायशी इलाकों का रुख कर रहा है। वहीं फसलें जलमग्न हो गई हैं। राप्ती कपरवार के बिनोवापुरी के निकट रुद्रपुर मार्ग, जबकि सरयू पैना के निकट रामजानकी मार्ग तक पहुंच गई है। नदी का पानी नगर के आजाद नगर दक्षिणी, पटेल नगर, नीलकंठ महादेव मंदिर, रगरगंज, मेहियवां, तेलियां शुक्ल, अधूरे बांध के कारण महेन गांव तक पहुंच गया है।
वहीं परसियां देवार के भरटोला, चौधरीपुरा, नकिहवां, महोब टोला और विशुनपुर देवार के स्कूलहिया, कत्लहिया, दलित बस्ती, चौहान, लोहार, बांके, किशुन, जैतुन टोला, नई दलित बस्ती, जरलहवा, रामदरश आदि टोलों में घुस गया है। राप्ती नदी के चारों ओर से घिरा भदिला प्रथम और कपरवार उग्रसेन सेतु के निकट गोरखपुर जनपद के विस्थापित कोलखास गांव के लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बेजुबानों को उठानी पड़ रही है।
बाढ़ खंड विभाग के सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी और अवर अभियंता नागेंद्र सिंह टीम के साथ कटइलवा, कुरह परसियां, महेन, मोहरा, केवटलिया बांध का जायजा लिया। अधिकारियों ने बंधों पर कुछ एक जगहों पर बने रेनकट, स्याही के मांद को दुरुस्त कराया। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण तटवर्ती गांवों के लोगों की नींदें उचट गई हैं। लोगों को 1998 और पिछले वर्ष की बाढ़ की याद ताजा कर रहा है।
12 घंटे बाद से जलस्तर में आ सकती है नरमी
बरहज। सरयू में सैलाब उमड़ आने से नदी के जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। जिससे बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों का रुख कर लिया है। वहीं नदी परसियां-विशुनपुर देवार में पीडब्ल्यूडी के बांध पर दबाव बना रही है। अधिकारियों के अनुसार रविवार को गोंडा और अयोध्या में नदी के जलस्तर में सात सेमी की कमी आई है। जबकि नेपाल रोजाना 3.25 लाख क्यूसेक पानी छोड़ रहा था। जो 2.80 लाख क्यूसेक हो गया है। जिससे 24 घंटे बाद नदी के पीछे हटने का कयास लगाया जा रहा है।
कोट-
नदी 68.00 मीटर पर बह रही है। 24 घंटे बाद नदी के घटने की संभावना है। बंधों का निरीक्षण किया गया है। फिलहाल खतरे जैसी कोई बात नहीं है।
-अशोक द्विवेदी सहायक अभियंता, बाढ़ खंड विभाग