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Deoria News: तीन साल में जिला अस्पताल के लिए नहीं खोज पाए जमीन... मरीजों की मुसीबत

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देवरिया। जिला अस्पताल बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। हालांकि तीन साल से इसकी कवायद चल रही है लेकिन जिला प्रशासन आज तक इसके लिए जमीन नहीं तलाश पाया। उधर, मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का बोझ बढ़ रहा है जिससे डॉक्टर मरीजों खासकर गंभीर मरीजों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, जिसका खामियाजा भी मरीजों को ही भुगतना पड़ रहा है। माना जा रहा हैै कि जिला अस्पताल बन जाने से मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का भार कम होगा और डॉक्टर बेहतर इलाज दे सकेंगे।
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मालूम हो कि बाबू मोहन सिंह जिला अस्पताल की करीब 28.18 एकड़ जमीन, भवन को मर्ज कर अप्रैल 2021 में महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। अस्पताल के डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य कर्मियों को भी तीन साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर संबद्ध कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ती गई। पड़ोसी राज्य बिहार के सीमावर्ती जिलों से भी लोग इलाज के लिए यहां आने लगे। जिला अस्पताल होने तक जहां 1000-1200 की ओपीडी थी, अब वह 3500-4000 तक पहुंच गई है। इसमें बेहद सामान्य बीमारी के मरीज भी मेडिकल कॉलेज आने लगे, जिस कारण गंभीर रोग के मरीजों को डॉक्टर पर्याप्त समय नहीं दे पाते। इसे देखते हुए जिला अस्पताल की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए करीब सात एकड़ भूमि चाहिए। इस पर कवायद भी शुरू हुई। करीब एक साल पहले भुजौली कॉलोनी में नगर पालिका की जमीन को चिह्नित किया गया था, लेकिन उस पर स्वीकृति नहीं मिल पाई। तब से जिला प्रशासन आज तक कोई दूसरी जमीन तलाश नहीं पाया, जहां जिला अस्पताल बनाया जा सके।



स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने दिए थे जमीन तलाशने के निर्देश



एक साल पहले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आगमन पर प्रशासनिक भवन के प्राचार्य कार्यालय में जिले के जनप्रतिनिधियों ने यह बात रखी थी। स्वास्थ्य मंत्री ने जमीन तलाशने और उपलब्ध कराने के बाद जिला अस्पताल निर्माण की बात कही थी। उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह से जल्द भूमि उपलब्ध कराने को कहा था। उसके बाद तत्कालीन डीएम ने शहर के भुजौली कालोनी के पास नगर पालिका की जमीन को चिह्नित किया, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिली। इसके बाद प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक भूमि नहीं मिल सकी है।
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कोट................



जिला अस्पताल के लिए प्रयास कर रहा हूं। प्रस्ताव भेजा था, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने आपत्ति दर्ज कराई। मैंने विधानसभा में भी मामले को रखा कि बिहार प्रांत से सटा होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग भी जिले में इलाज कराने आते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल आवश्यक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मिल कर भी मांग की है।



-डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, विधायक, देवरिया सदर
कोट

जनप्रतिनिधियों की ओर से जिला अस्पताल को लेकर मांग की जा रही है। मेडिकल कॉलेज में भीड़ का दबाव है। इसको देखते हुए जनप्रतिनिधियों की मांगों पर पहल की जाएगी। पहले के प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।
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दिव्या मित्तल, डीएम
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