दुग्ध सहकारी समिति के रजिस्ट्रार के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश सरकार ने जनपद स्तर की घाटे में चल रही डेयरी को मंडल स्तर की डेयरी में विलय करने का निर्णय लिया है। आदेश के तहत देवरिया दुग्ध संघ सहित कुशीनगर, महराजगंज और मंडल के अन्य जिलों पर संचालित दुग्ध सहकारी समितियों और दुग्ध संघ को गोरखपुर के दुग्ध संघ में मिला दिया जाएगा। जनपद स्तर की डेयरी को गोरखपुर में मर्ज करने की कार्रवाई तेजी से चल रही है। इस कार्रवाई से दुग्ध संघ के सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी जाने का खतरा है। दुग्ध संघों के विलय को लेकर डेयरी कर्मचारी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।देवरिया दुग्ध संघ के विलय के दो दिन पहले दुग्ध सहकारी समितियों के सामान्य निकाय की बैठक बुलाई गई। जो रद्द कर दी गई। डेयरी के विलय के बाद उसरा दुग्ध अवशीतन केंद्र पर कार्यरत 10 कर्मचारियों की नौकरी जाना तय माना जा रहा है। देवरिया दुग्ध संघ से करीब 306 दुग्ध सहकारी समितियों का संचालन किया जाता रहा है। वर्तमान में आधे से अधिक समितियां मृतप्राय हो चुकी हैं। जिले में सिर्फ 56 समितियां दूध का उत्पादन कर रही हैं। देवरिया सहित मंडल के सभी जिलों पर संचालित डेयरी कई वर्षों से घाटे में चल रही है। दूध का उत्पादन नहीं होने से दुग्ध संघ में कार्य करने वाले कर्मचारियों को समय से वेतन भी नहीं मिल पाता है। समितियों के पुनरुद्धार को सरकार के अनुदान देने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ।ऐसे में प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी छोटी डेयरी को बंद कर मंडल स्तर पर हाईटेक डेयरी संचालित करने का निर्णय लिया। निबंधक दुग्ध सहकारी समितियों से पारित आदेश में दूध संघ में काम करने वाले प्रादेशिक सहकारिता फेडरेशन के कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का सुझाव दिया गया है। वहीं, दुग्ध संघ के कर्मचारियों की सेवा को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है। ऐसे में दुग्ध संघ और पीसीडीएफ के कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंता में हैं।