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रोडवेज भवन निर्माण के लिए नहीं मिला धन
भवन गिराए एक वर्ष बीत चुके, यात्रियों के अलावा रोडवेज कर्मियों को भी है नया भवन मिलने का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला मुख्यालय स्थित रोडवेज परिसर से प्रतिदिन यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को ठहरने के लिए नए भवन के निर्माण की दरकार है। एक वर्ष पूर्व पुराने भवन को ढहा दिए जोन के बाद से यात्रियों के साथ ही कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। परिवहन मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री दयाशंकर सिंह की ओर से दो बार घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक अत्याधुनिक रोडवेज के भवन के निर्माण को स्वीकृति तक नहीं मिल पाई है। ऐसे में अत्याधुनिक भवन के निर्माण की घोषणा हवा-हवाई ही साबित हुई है।
शहर में स्थित परिवहन निगम का रोडवेज परिसर है। एक वर्ष पूर्व नीलामी के बाद जर्जर भवन को ध्वस्त कर दिया गया। इससे कभी कभी परिसर वीरान सा दिखता है। नए भवन निर्माण के लिए जिम्मेदारों की ओर से भी कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। कर्मचारी टिन शेड में बैठकर काम करने को मजबूर है। कई बार बारिश के मौसम में अभिलेख भीग जाते हैं।
ठंड, गर्मी व बारिश में कर्मचारियों व यात्रियों को भवन न होने का दर्द हमेशा सालता रहता है। परिसर के पीछे नया बना यात्री विश्रामालय इतना पीछे है कि इधर कोई जाता ही नहीं है। पूरा परिसर गड्ढायुक्त हो गया है। यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। इस वजह से यात्रियों को खड़े रहकर या जमीन पर बैठकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
परिवहन निगम के बसों की संख्या 69
अनुबंधित बसों की संख्या 129
प्रतिदिन ढोए जाने वाले यात्रियों की संख्या- 28 से 30 हजार
यात्रियों से प्रतिदिन रोडवेज की आय- 20 से 22 लाख
स्पीकअप देवरिया डिपो में हर रोज बस पकड़ने आना होता है, लेकिन यहां यात्री विश्रामालय तक नहीं है, इससे परिसर में ही खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। इससे अच्छा तो पुराना भवन था तो कम से कम मौसम की मार नहीं झेलनी पड़ती थी।
-प्रवीण पांडेय, यात्री
रोडवेज परिसर में इधर-उधर खड़े होकर इंतजार करना मजबूरी बनती जा रही है। कब तक नया भवन मिलेगा, कोई कुछ बताता नहीं है। पूछताछ केंद्र को बसों के खड़े होने के स्थान से बहुत पीछे स्थापित किया गया है।
-मनीष कुमार, यात्री
रोडवेज परिसर में नए भवन का निर्माण कार्य का मामला शासन स्तर का है। 15 दिन पहले ही वह यहां आए हैं ऐसे में इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। जो भी समस्या है, उससे उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाता है।
-मो. इरफान, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक