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मेडिकल कॉलेज में दंत रोगियों की नहीं दूर हो रही पीड़ा

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मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग में दिखाने के लिए खडे मरीज व तिमारदार।संवाद - फोटो : DEORIA
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मेडिकल कॉलेज में दंत रोगियों की नहीं दूर हो रही पीड़ा
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संसाधन के अभाव में नहीं मिल पा रहा इलाज, पुराने औजारों से निकाले जा रहे दांत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में दंत रोगियों की पीड़ा दूर नहीं हो पा रही है। संसाधनों के अभाव में मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। उन्हें निराश होना पड़ रहा है। यहां पुराने औजारों के सहारे केवल किसी तरह दांत निकालने व साफ करने का कार्य फिर शुरू हुआ है। एक्स-रे न होने से बीमारी का पता नहीं चल पाता है। मरीजों को आरसीटी (रूट कैनाल ट्रीटमेंट) सहित अन्य कार्य के लिए निजी अस्पताल का सहारा लेेना पड़ रहा है, जिससे अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
दंत विभाग में हर रोज औसतन करीब सत्तर मरीज आते हैं। इसमें दांत में पस, सड़न, सूजन, पायरिया सहित अन्य बीमारियों के शामिल होते हैं। यहां असिस्टेंट प्रो. डॉ. अफसाना, डेंटिस्ट जेआर डॉ. तूलिका सिंह, डॉ. सौरभ की तैनाती होने के बाद भी मरीजों का लाभ नहीं मिल रहा है। यहां एक्स-रे की सुविधा न होने से बीमारी की ठीक से जानकारी करने में परेशानी हो रही है। कंप्रेशर न होने से दांत की कटाई, आरसीटी नहीं होता है। सड़े दांत भरने के लिए मसाला तथा चांदी भी नहीं है।
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माइनर सर्जरी के लिए भी सामान नहीं हैं। दुर्घटना में जबड़ा टूटने, होंठ कटने आदि के इलाज की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। टांका लगाने का इंतजाम नहीं है। ऐसे में मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। उन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। मुंह के कैंसर के लक्षण वाले मरीज भी माह से तकरीबन दो आते हैं। जांच की व्यवस्था न होने तथा लक्षण के आधार पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
सप्ताह में दो दिन निकाले जा रहे दांत
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में पहले दांत निकालने तथा साफ करने का काम होता था, लेकिन नए भवन में ओपीडी शिफ्ट होने के बाद यह कार्य ठप था। इससे मरीजों को परेशानी हो रही थी। अब फिर इसे शुरू किया गया है। सप्ताह में बुुधवार व शनिवार को दांत निकालने व साफ करने का कार्य शुरू हुआ है। प्रथम दिन पिछले बुधवार 18 लोगों के दांत निकाले व साफ किए गए। किसी तरह पुराने संसाधनों से काम चलाया जा रहा है। डेंटल चेयर भी हाइड्रोलिक है। उसे ऊपर, नीचे करना पड़ता है। अल्ट्रा सोनिक स्केल भी पुराना है, जो ठीक से काम नहीं करता, रोशनी के लिए हैलोजन नहीं है। औजार भी काफी पुराने हैं, जो कुछ कम ही हैं। उन्हें बार-बार ब्वॉयल करना पड़ता है, इससे समय बर्बाद होता है।
पांच दिन में इलाज के लिए आए 338 मरीज
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के दंत विभाग में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। पांच दिन में 338 लोग इलाज कराने पहुंचे। इसमें बाइस अगस्त को 81, तेइस को 72, चौबीस को 33, पचीस को 77 व छब्बीस अगस्त को 75 लोगों का इलाज किया गया।
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कोट
दंत विभाग में बेहतर इलाज के लिए मशीनों और संसाधनों को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं आने वाले दिनों व्यवस्था सुदृढ़ हो जाएगी। इसके बाद मरीजों काफी सहूलियत होगी।
- डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक
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