वर्ष 2006 में पोखरी की भूमि पर कब्जा करने के मामले में किया गया था बेदखली का आदेेश, गांव के ही एक व्यक्ति ने अतिक्रमण को खाली कराने के लिए हाईकोर्ट में की थी अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। ब्लॉक के डूमवलिया गांव के पोखरी की भूमि पर वर्षों से बने पक्के मकान को तहसील प्रशासन ने सोमवार को बुलडोजर लगाकर ध्वस्त करा दिया। इसे लेकर पोखरी की भूमि पर कब्जाधारी व पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। मामला बढ़ता देख पुलिस ने विरोध कर रही एक महिला समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर कोतवाली में बैठा लिया। गांव का ही एक व्यक्ति ने पोखरी की भूमि पर कब्जे को लेकर हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। जिसके क्रम में वर्ष 2006 में बेदखली कर दिया गया था। इसके बावजूद अतिक्रमणकारी कब्जा खाली नहीं कर रहा था।
तहसील क्षेत्र के डूमवलिया गांव निवासी संतोष तिवारी ने अपील दाखिल कर बताया था कि गांव की पोखरी की भूमि पर सुभाष व उदयनारायण तिवारी द्वारा अतिक्रमण कर पक्का मकान का निर्माण कर लिया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने तहसील सलेमपुर को वर्ष 2006 में बेदखली का आदेश दिया था। जिसके बाद तहसीलदार कोर्ट में बेदखली का आदेश भी कर दिया। उसके बाद कई बार तहसील प्रशासन बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची थी, लेकिन उसे निराश लौटना पड़ा। इसी बीच उदयनारायण तिवारी ने स्थगन आदेश ले लिया, जिसके बाद काफी दिनों तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। इसी बीच 29 मई को उदय नारायण तिवारी का स्थगन आदेश खारिज कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश जारी कर दिया गया। 17 जून को तहसीलदार कोर्ट ने उन्हें नोटिस देकर एक सप्ताह के अंदर स्वयं पोखरी की भूमि पर बने मकान को ध्वस्त कराने का निर्देश दिया। लेकिन इसे अतिक्रमणकारी ने गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद सोमवार को एसडीएम ध्रुव कुमार शुक्ला, सीओ विनय कुमार यादव, तहसीलदार मिश्रीलाल चौहान, नायब तहसीलदार डॉ. भागीरथ सिंह, गोपाल जी, कोतवाल गोपाल पांडेय, कानूनगो राधेश्याम, लेखपाल रजनीश मिश्रा समेत राजस्व विभाग व पुलिस विभाग के कर्मचारियों के साथ सोमवार सुबह करीब नौ बजे पहुंचे। मौके पर पुलिस व राजस्व विभाग की टीम को देख पोखरी की जमीन पर कब्जा जमाकर बैठे उदय नारायण तिवारी व उनके बेटे रंजीत तिवारी उर्फ भोलू दरवाजे पर बैठे थे। उनकी बेटी ममता अपने बेटे अमन मिश्रा के साथ घर में बैठी थीं। तभी राजस्व विभाग व पुलिसकर्मियों ने मकान को तत्काल खाली करने की बात कही। यह सुनकर महिला ने घर के अंदर से गेट बंद कर लिया। ढाई घंटे सीओ व एसडीएम के प्रयास के बाद महिला ने दरवाजा खोला। उसके बाद पुलिसकर्मियों ने सफाई कर्मचारियों को लगवा कर सामान बाहर निकलवाया। जब इसका विरोध परिवार के लोगों ने किया तो पुलिस उदय नारायण तिवारी, उनकी बेटी ममता, बेटा रंजीत तिवारी और उनके बेटी के बेटा अमन मिश्रा को अपने वाहन में बैठाकर कोतवाली ले कर चली गई और गांव के लोग मूकदर्शक बने रहे। घर का सामान बाहर निकालने के बाद करीब चार बजे से तीन बुलडोजर, दो क्रेन लगाकर इमारत को ध्वस्त करने का काम शुरू हुआ। समाचार लिखे जाने तक ध्वस्तीकरण का कार्य चल रहा था।
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तहसील प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहमे गांव के लोग, कई लोगों का है पोखरी पर कब्जा
गांव में तकरीबन 10 कट्ठा में स्थित पोखरी की भूमि पर कई लोग अवैध रूप से कब्जा कर बैठे हैं। तहसील प्रशासन की तरफ से सोमवार को हुई कार्रवाई के बाद गांव के लोग सहमे हुए हैं, वहीं अतिक्रमणकारियों में इसे लेकर दहशत का माहौल है। सूत्रों के मुताबिक पोखरी की भूमि पर गांव के अच्छे-अच्छे लोग कब्जा कर बैठे हुए हैं। अगर ठीक से जांच की जाए तो कई लोग बेघर हो जाएंगे।
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दो थाना समेत पुलिया लाइंस व पीएससी को किया गया तैनात
पोखरी की भूमि पर बने पक्के मकान को ध्वस्त कराने के दौरान पुलिस प्रशासन चौकन्ना रहा। यहां कोतवाली पुलिस के अलावा लार थाने की पुलिस, पुलिस लाइंस एवं पीएससी की एक बटालियन लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया गया था। गांव के लोग कुछ बोलने से सहम रहे थे।
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मकान की करीब दो करोड़ की लगाई जा रही अनुमानित कीमत
पोखरी की भूमि पर बने पक्के मकान की कीमत करीब दो करोड़ लगाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक जिस तरह से घर बनाया गया है। वह आज के परिवेश में आसानी से बनाना संभव नहीं है।