- अगर उपलब्ध रहते दीये तो मनचाहे रेट पर बिके होते
- जिन्हें नहीं मिले दीये वह मोमबत्ती जलाए
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में सोमवार को दीयों की खूब बिक्री हुई। किसी के स्टाॅक में एक भी दीये नहीं बचे। अगर और दीये उपलब्ध रहे होते तो वह मनचाही कीमत पर बिक गए होते। दीयों की बिक्री का आलम यह रहा कि दिवाली से भी अधिक कुम्हारों के पास एडवांस में ऑर्डर लगा रहा। क्षेत्र के कुम्हारों के स्टाॅक में एक भी दीये नहीं बचें। ऐसे में बहुत सारे रामभक्तों ने मोमबत्ती जलाकर दीपोत्सव मनाया।
अयोध्या में सोमवार को आयोजित भगवान की राम प्राण प्रतिष्ठा पर हर घर और मंदिरों में दिवाली मनाने की धूम मची रही। बहुतों ने पहले से ही दीये खरीद रखें थे तो दो दिन पहले से खरीदारी करने लगे। ऐसे में पहले खरीदारी करने वालों को सस्ते मूल्य पर दीये उपलब्ध हो गए। मगर रविवार और सोमवार को जिन्होंने दीये खरीदे उन्हें तीन से चार सौ रुपये सैकड़े पर दीये उपलब्ध हुए। इसके बावजूद प्राण प्रतिष्ठा के दिन दीये कुम्हारों के पास नहीं अटे। बृजलाल प्रजापति, सिद्धार्थ कुमार और प्रदीप कुमार सहित अन्य कुम्हारों का कहना है कि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर दीयों की मांग देखने को मिली है। दिवाली से कही ज्यादा दीयों की मांग रही है। अगर इस समय पचास हजार या उससे भी अधिक दीये रहते तो महज एक से दो घंटे में मनचाहे रेट पर बिक गए होते। भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा पर चहुंओर दीयों की मांग रही। सबसे खास बात यह देखने को मिली कि सैकड़ा से कम किसी ने दीये नहीं लिए। यही वजह थी कि लोगों के मांगों के सापेक्ष दीये उपलब्ध नहीं हो पाए। मौसम भी दगा दे गया। अगर मौसम साथ दिया रहता तो कुछ हद तक दीये उपलब्ध हो गए होते। इसके लिए कड़ी धूप की जरूरत थी। दिवाली में तो दीये बिकते है मगर इतने बड़े पैमाने पर दीयों की बिक्री जीवन में पहली बार देखी जा रही है।
प्राण प्रतिष्ठा के दिन अगर एक लाख भी दीये होते तो वह भी कम पड़ जाता। इतनी अधिक दीये की मांग जीवन में पहली बार देखी जा रही है।दीये उपलब्ध नहीं होने केवल पछतावा ही हाथ लगा है। इसको देखिए आने पर दो सौ दीये चाहिए, नहीं है जवाब पर डेढ़ सौ दे दीजिए। इससे कम किसी का आर्डर नहीं आ रहा था।
-विंध्याचल प्रजापति, दीया कारोबारी
पहले स्टाॅक में रखा गया जितना दीया पहले ही बिक गया। उम्मीद ही नहीं थी कि इस समय इतनी ज्यादा संख्या में दीयों की मांग आएगी। रविवार और सोमवार को जितने लोग दीये के लिए आकर वापस लौटे इससे यह अनुमान लग रहा था कि अगर पचास से साठ हजार दीये तैयार रहते तो घंटे भर में बिक जाते। अब तो सिर्फ पछतावा ही हाथ लगा है। काश पहले जानकारी रहती तो एक माह पहले ही चार पांच लाख दीये तैयार कर स्टॉक में रख लिया गया होता।
-संदीप कुमार प्रजापति, दीया कारोबारी खुखुंदू चौराहा