फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: पाठ से हटा डार्विनवाद का सिद्धांत, छात्र कैसे जानेंगे बंदर से इंसान बनने का सफर

Thu, 04 May 2023 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
विज्ञापन
विज्ञापन
एनसीईआरटी की नौवीं और दसवीं की किताब से हटाया गया पाठ
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। एनसीईआरटी की नौवीं और दसवीं की किताब से डार्विनवाद का सिद्धांत का पाठ हटा दिया गया है। इसके जरिए छात्रों को पढ़ाया जाता था कि इंसान कभी बंदर था और बाद में विकासवादी सिद्धांतों के आधार पर मानव हो गया। इसे लेकर छात्र और अध्यापकों में चर्चा हो रही है।
वैज्ञानिक चार्ल्स राबर्ट डार्विन का विकासवादी सिद्धांत की पढ़ाई नौवीं और दसवीं में नहीं होगी। इसके जरिए अध्यापक छात्रों को बताते थे कि लाखों वर्षों पहले बदलाव के बाद बंदरों से इंसानी प्रजाति का विकास हुआ। डार्विन के अनुसार पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव एक ही प्रजाति की उत्पत्ति हैं। पृथ्वी पर सबसे पहले एक कोशिका वाले जीव बने, जो पानी में रहते थे। इन जीवों ने समय के अनुसार खुद को ढाल लिया। इसके बाद बहुकोशिकीय बने। जीव विकास की यात्रा लाखों वर्षों पहले तक चली है। डार्विन ने इसका विस्तार वर्णन अपनी पुस्तक ओरिजन ऑफ स्पेसीज में किया है। पाठयक्रम हटाए जाने पर अध्यापक और छात्र हैरान हैं कि ऐसा कदम क्यों उठाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

फोटो
कोट
जब हम आपस में मानव का विकास कैसे हुआ की बातों पर चर्चा करते थे तो डार्विन के सिद्धांतों का उदाहरण देकर एक दूसरे को समझाते थे। पाठ्यक्रम से महत्तवपूर्ण पाठ को हयाना ठीक नहीं है। रिशु सिंह, कक्षा दस
-
कोट
डार्विन का सिद्धांत प्रचलन में था। मानव विकास का सफर समझने के अच्छा माध्यम है। पता नहीं इसे पाठ से क्यों हटा दिया गया है। इसे पढ़ाया जाना चाहिए।
गरिमा यादव, छात्र, कक्षा दस

डार्विन के सिद्धांत से बच्चों को विकास की प्रक्रिया समझाने में आसानी होती थी। उन्हें बहुत सरलता से मानव का विकास क्रम जानने-समझने को मिलता था।
दीपक कुमार, अध्यापक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें