बघौचघाट थाने में एक निजी फाइसेंस कंपनी के प्रबंधक की ओर से रुपये वापस न करने पर पंचायत हुई।
बघौचघाट में फाइनेंस के नाम पर एक निजी कंपनी ने कई लोगों के साथ धोखाधड़ी की है। मामला प्रकाश में आने के बाद मंगलवार को नाराज लोगों ने कंपनी में मैनेजर का पद संभाल रहे व्यक्ति को बंधक बना लिया। थाने में करीब दो घंटे तक चली पंचायत के बाद उसे छोड़ दिया गया।
विश्वामित्र नाम की एक कंपनी पिछले कई साल से इलाके के लोगों से रुपये जमा करा रही थी। बघौचघाट में ब्रांच कार्यालय खोला गया। इसमें पांच सौ रुपये से लेकर पांच हजार तक लोगों ने जमा किया। रामपुर महुआबारी निवासी जितेन्द्र के अस्सी हजार, बेलम्हा निवासी राजेश, कल्पनाथ के चालीस-चालीस हजार रुपये, बघौचघाट के राजकुमार के 90 हजार, रंजन सहित सैकड़ों लोगों ने करीब 52 लाख रुपये जमा कर रखा था। कुछ दिन से कंपनी ने लेन-देन बंद कर दिया तो लोगों को आशंका हुई। उन्होंने कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की।
मुंडेरा गांव का रहने वाला स्थानीय मैनेजर भी कार्यालय छोड़कर भाग निकला। मंगलवार की दोपहर मैनेजर को लोगों ने बघौचघाट बाजार में देखा और पकड़ दिया। धीरे-धीरे काफी भीड़ जुट गई। मैनेजर का लेकर लोग थाने पहुंचे और रुपये की मांग करने लगे। इसी बीच कुछ लोगों ने रुपये वापस करने की जिम्मेेदारी नाराज से ली। पंचायत के बाद पुलिस ने बंधक बनाए गए मैनेजर को छोड़ दिया। एसओ रामअशीष यादव ने बताया कि कंपनी द्वारा रुपये लेकर भागने की तहरीर मिली है। जांच की जा रही है।