कैदियो के कब्जे से गैस सिलिन्डर लेकर बाहर आते एसआई।
बंदियों रक्षकों और बंदियों के बीच विवाद के बाद जिला कारागार सुर्खियों में आ गया। हालांकि एसपी प्रभाकर चौधरी की सूझबूझ से कारागार में बड़ा हादसा टल गया। क्योंकि बंदियों ने कुछ योजना ही ऐसी बनाई थी। सुनियोजित हमले की रुपरेखा में सबसे बड़ी बात यह थी कि जेल अधीक्षक को दौड़ाने के बाद करीब सौ बंदियों ने मेस को अपने कब्जे में ले लिया। दाल, रोटी, चना, चाय सहित अन्य सामान जमीन पर फेंकने के बाद करीब बीस गैस सिलिंडर को अपने कब्जे में ले लिया। सभी सिलिंडरों को गेट नंबर दो के पास रख दिया और बगल में आग लगा दी।
बंदियों ने बैरकों के सभी दीवारों को तोड़कर ईट को इक्कठा कर लिया। पुस्तकालय और अर्धनिर्मित बाथरूम में मौजूद ईट को भी अपने कब्जे में ले लिया था। एसपी जब हमराहियों के साथ जेल में दाखिल हुए तो बदमाशों की मंशा भांप गए। उन्होंने पहले बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। बिना समय गवाएं शहर के सटे सभी थानेदारों के साथ अतरिक्त फोर्स को बुला दिया। करीब पंद्रह फीट की चार दीवारी फंदकर एसपी ने बदमाशों के चाल की रूप रेखा को पहचान लिया। एसपी को दीवार पर चढ़ा देख अन्य पुलिसकर्मी भी फार्म में आ गए।
बंदियों की तरफ कई आंसू गैस छोड़े गए लेकिन पछुआ हवा के कारण सबसे अधिक परेशानी पुलिसकर्मियों को हुई। फिर दूसरे तरफ आंसू गैस के गोले दागे गए। उपद्रवी गैस सिलिंडरों को आग के हवाले करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच एसपी, एएसपी, कोतवाल, पीआरओ, भलुअनी और रामपुर कारखाना के थानाध्यक्ष मुख्य गेट पर पहुंचे और उसे खोलने का प्रयास करने लगे। लेकिन ताला के अंदर शातिरों ने कागज डाल रखा था बाद में उसे खोलकर पुलिसकर्मी गेट के अंदर दाखिल हुए।
एसपी खुद आगे चल रहे थे बाकी फोर्स पीछे से सभी गैस सिलिंडरों को अपने कब्जे में लेने के बाद पुलिस ने जेल राइटरों की खोजबीन शुरू कराई। उनकी निशानदेही पर उपद्रव करने वालों को चिन्हित किया गया। करीब एक घंटे तक पुलिस विभिन्न बैरकों में रही। बुजुर्ग, विकलांग और बच्चों को छोड़कर पुलिस ने सभी बदमाशों की खातिरदारी की। जेल से निकलने के बाद सभी पुलिसकर्मियों का यही कहना था कि आज कप्तान ने बड़ा हादसा टाल दिया।