देवरिया के सेंट्रल बैंक से पौने तीन करोड़ रुपये की चोरी करने के मामले में आरोपी बर्खास्त सिपाही श्रीप्रकाश सिंह को कोर्ट से जमानत दे दी। शातिर आरोपी जेल से रिहा भी हो गया। करीब एक साल बाद भी कोतवाली पुलिस चोरी गए करीब एक करोड़ रुपये बरामद नहीं कर पाई है। श्रीप्रकाश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच धीमी हो गई। नतीजा रहा कि शातिर जेल से बाहर आ गया
तीन अप्रैल 2015 को सेंट्रल बैंक आफ इंडिया मुख्य शाखा अंसारी रोड के स्ट्रांग रुम के करेंसी चेस्ट से पौने तीन करोड़ रुपये चोरी हो गए थे। ड्यूटी में तैनात आरक्षी श्रीप्रकाश सिंह फरार था। करेंसी चेस्ट के इंचार्ज वीके सिंह की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। तत्कालीन प्रभारी कोतवाल गजेंद्र राय की टीम ने फरार चल रहे आरोपी सिपाही श्रीप्रकाश सिंह के बेटे प्रशांत उर्फ गगन सिंह को गिरफ्तार कर 18 लाख रुपये बरामद किया था। तीन दिन बाद सोनूघाट के पास चार पहिया से जा रहे श्रीप्रकाश सिंह के गाड़ी चालक धर्मेंद्र यादव उर्फ बबलू को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 75 लाख रुपये बरामद हुआ था।
13 अप्रैल को पुलिस ने श्रीप्रकाश सिंह के दूर के रिश्तेदार अजीत सिंह और राजकुमार सिंह बट्टू के पास से एक लाख 65 हजार रुपये बरामद किया था। इसी बीच डीजीपी ने फरार चल रहे आरोपी श्रीप्रकाश सिंह को बर्खास्त कर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। पुलिस श्रीप्रकाश सिंह के घर आजमगढ़, जहानागंज के असौना से कई लोगों को पकड़ा था।
23 मई को मुखबिर की सूचना पर यूपी एसटीएफ, कोतवाली और गौरीबाजार की टीम ने आजमगढ़ जहानागंज रोड रेलवे क्रासिंग के पास से अल्टो कार में सवार श्रीप्रकाश सिंह को सात साथियों के साथ गिरफ्तार किया था। श्रीप्रकाश सिंह के अलावा जसवंत सिंह, ब्रजेश सिंह, चंदन शुक्ला, मुकेश तिवारी, अशोक सिंह, संजय सिंह और कमलेश सिंह के पास से करीब 19 लाख रुपये बरामद हुए थे।
चोरी गई रकम से पुलिस ने एक करोड़ 13 लाख, पचास हजार रुपये बरामद किया। जेल जाने के बाद कोतवाली पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की। देवरिया कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद आरोपी ने ऊपरी अदालत में अपील कर रखी थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने श्रीप्रकाश को जमानत दे दी। परवाना मिलने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया।