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पुलिस की खामोशी से दो परिवार तबाह

Wed, 13 Jul 2016 10:23 PM IST
देवरिया
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बरहज के करौंदी गांव में अरविंद के रोत बिलखते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
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विकास तिवारी
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बरहज/मगहरा। बरहज के करौदी गांव में जमीन के विवाद को सुलझाने में प्रशासन ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसका नतीजा रहा कि दो पट्टीदार एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। दोहरे हत्याकांड की पृष्ठभूमि मार्च में ही तैयार हो गई थी।

दो परिवारों के झगड़े ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। युवक अरविंद चौहान की गोली मारकर हत्या के बाद प्रतिशोध में हत्यारोपी के पिता द्वारिका चौहान पीटकर हत्या कर दी गई। घटना के लिए गांववाले पुलिस की ओर से पूर्व में कार्रवाई नहीं करने पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
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लोगों का कहना था कि हत्यारोपी बुल्लू चौहान को राजनीतिक प्रश्रय मिला था। जिसके चलते पूर्व की घटनाओं पर तत्कालीन थानेदार पर्दा डालते रहे। बुधवार को बरहज पुलिस की करतूत की जानकारी मौके पर गए कप्तान प्रभाकर चौधरी को मिल गई है। घटना की तह में जाएं तो 29 मार्च की रात मृतक अरविंद की दिव्यांग चाची कस्तूरी देवी के पट्टे के खेत में लगे 360 सागौन केे पेड़ को काट लिया गया।

पेड़ काटने का आरोप बुल्लू चौहान के घरवालों पर लगा। जिसका मामला थाने पहुंचा, लेकिन पुलिस ने मामले का अल्पीकरण करते हुए शांतिभंग की कार्रवाई कर चुप बैठ गई। मई में बुल्लू ने अरविंद के पनप रहे सागौन के पौधों को केमिकल डालकर जला दिया। जिस पर दोनाें घरों के बीच तकरार हुई, उस समय बुल्लू ने फिर तमंचा निकाला लेकिन अरविंद ने भागकर अपनी जान बचाई थी।
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मामला थाने तक पहुंचा, लेकिन पुलिस ने पीड़ित पक्ष को तरजीह नहीं दी। गांववालों की मानें तो बुल्लू अवैध असलहा रखने का शौकीन था। जिसे देख गांववाले डरते थे। उसने गांव में सरकारी जमीन पर बन रहे रास्ते को बनने नहीं दिया था। सरकारी जमीन उसके कब्जे में है।
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