मदनपुर थाने में जली हुई पब्लिक की बंदूकों का निरीक्षण करते एसडीएम घनश्याम
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देवरिया। जिनके कंधों पर आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वे खुद की सुरक्षा करने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं। उपद्रवी पुलिस के साथ दो-दो हाथ कर उनके असलहों को ही लूट ले जा रहे हैं। मदनपुर में हुई घटना में उपद्रवियों ने दो रिवाल्वर और एक बैनट लूट ली। इसके पहले में भी कई असलहे गायब हो चुके हैं जो आज तक बरामद नहीं हो सका। जब भी असलहा गायब हुआ संबधित थाने में केस दर्ज कर पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया जाता है और वेतन से असलहे का दाम वसूल कर लिया जाता है।
कुछ समय बाद विवेचक भी थक-हारकर फाइनल रिपोर्ट लगा देते हैं। फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। सलेेमपुर के पूर्व सांसद स्व. हरिकेवल कुशवाहा की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी की वर्ष 2008 में कारबाइन और 2005 एक सुरक्षाकर्मी का पिस्टल चोरी हो गई। आवास में आराम करते हुए गायब असलहों के बारे में पुलिस कुछ दिन तक सक्रिय रही। इस दोनों मामले में सलेमपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था लेकिन सुराग नहीं लग सका। 2009 में बरहज थाने में तैनात दरोगा नदी पर परसिया देवार में शव के पंचनामा कराने गए थे।
रात में उसी गांव में रुक गए। सुबह पता चला कि सर्विस रिवाल्वर चोरी हो गई। आज तक पुलिस रिवाल्वर का पता नहीं चला। 2006 में ट्रेन में यात्रा करते समय पंजाब जा रहे सीआरपीएफ जवान का असलहा भाटपाररानी से भटनी के बीच में गायब हो गया। इस मामले में जीआरपी में केस दर्ज हुआ, लेकिन हथियार के बारे में सुराग नहीं मिल सका।
रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के पटनवापुल कांड में एक सिपाही को पीटकर उसकी राइफल छीन ली गई थी और राइफल आज तक नहीं मिली। पुलिस के गायब असलहों पर गौर किया जाए तो एक बात साफ है कि असलहों की गोली दिलाने वाले पुलिस के करीब हैं क्योंकि पुलिस विभाग के असलहे में लगने वाली गोली प्राइवेट दुकानों पर नहीं मिलती।