देवरिया के जेल में विद्रोह फैलाने वाले बदमाशों की कुंडली तैयार हो गई है।
सभी के आपराधिक इतिहास को खंगाला जा रहा है। जेल में आगजनी, तोड़फोड़ और जेल अधीक्षक के साथ राइटर के जान मारने की कोशिश करने वाले 17 नामजद बंदियों को दूसरे जेल में भेजने की तैयारी चल रही है। बकायदे इसकी रिपोर्ट तैयार हो गई है। विवाद करने वाले अधिकांश बदी बाहरी जिलों के है जो कई बार जेल में बवाल कर चुके हैं।
सूत्रों की माने तो शासन से अनुरोध कर ऐसे सभी बदमाशों को पश्चिम यूपी में भेजने की तैयारी चल रही है।
जेल में बवाल और आगजनी के बाद बुधवार को सामान्य तौर पर प्रशासन ने काम किया। सूत्रों के अनुसार, जेल में फायरिंग, बवाल, और आगजनी की पूरी रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट में बंदियों के उत्पात के बाद शांति बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने का जिक्र किया गया है। कुल मिलाकर जिला पुलिस, जेल पुलिस और जिला प्रशासन को रिपोर्ट में क्लीन चिट मिल गई है। उधर, विवाद के बाद करीब चार सौ अज्ञात बंदियों की शिनाख्त में पुलिस जुटी है।
जेल में बवाल के बाद मंगलवार की देर रात प्रभारी कारपाल ओपी यादव ने कोतवाली में तहरीर दी कि शाहआलम, विशाल सिंह, सन्नी मिश्रा, रवि साहनी, अद्या निषाद ने बैरक नंबर एक दो के हाते में राइटर धनवंतरी के ऊपर जानलेवा हमला कर दिया। एक से छह के सभी बंदी जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सभी जेल में सुविधा को लेकर दबाव बना रहे थे।
इसी बीच बंदी रक्षक जगरनाथ यादव ने सेट से सूचना दी कि उसे कुछ बंदियों ने बंधक बना लिया है। जेल में बंदियों ने जमकर उत्पात मचाया। सरकारी अभिलेेख जला दिया और जेल अधीक्षक पर हमला करने की कोशिश की। पुलिस ने 12 राउंड फायरिंग की।
बंदियों की तरफ से जेल में काफी नुकसान पहुंचाया गया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने शाहआलम, विशाल सिंह, सनी मिश्रा, रवि साहनी, अद्या निषाद, सुनील सिंह, रविन्द्र, मनोज राय, विजय यादव, विजय जायसवाल, अती सिंह, प्रभाकर मिश्र, सुरेन्द्र यादव, जितेन्द्र पांडेय, बबलू उर्फ मिथलेेश सिंह, बबल उर्फ शिवतुल्ला और जितेन्द्र के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा, आगजनी, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया। इसके अलावे तीन से चार सौ अज्ञात लोगों को घटना में आरोपी बनाया गया है।
जेल में बवाल के बाद कराई गई वीडियोग्राफी से अज्ञात बदमाशों की पहचान होगी। पूरे मामले की विवेचना कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक राणा देवेंद्र सिंह को सौंपी गई है। सूत्रों की माने तो नामजद बदमाश हत्या, रंगदारी, लूट और डकैती जैसे जघन्य अपराध में आरोपी हैं। उपद्रवियों ने जेल अधीक्षक को निशान क्यों बनाया। जांच डीआईजी कर रहे हैं। विवाद के बाद उन पर खतरा बढ़ गया है।
पीएससी के अलावा दो थानेदारों की ड्यूटी लगाई जा रही है।