सलेमपुर। हंसते खेलते बच्चों के मौत की खबर जब गांव पहुंची तो घरवाले बदहवाश हो गए। महिलाओं की चीत्कार सुनकर लोगों की आंखें भर आईं। काल बनकर टूटा मिट्टी का अड़ार इंदल प्रसाद के घर का चिराग बुझा दिया।
अपनों को खोने वाले मजदूरों की आंखों में आंसू और जुबां पर एक ही सवाल था, कहां तुम चले गए। मजदूर इंदल प्रसाद का इकलौता बेटा इशू था। एक छोटी बेटी है। बेटे की जब मौत की खबर मिली तो वह दहाड़े मारकर रोने लगा। अस्पताल में बार-बार बेहोश हो जा रहा था। यह देख अस्पताल में पहुंचे लोगों की आंखें भर आईं।
रामछबिला के तीन बेटों में रितेश उर्फ रवि सबसे छोटा था। घर में छोटा होने के कारण वह सभी का चहेता था। उसकी मौत के बाद घरवाले बदहवाश हो गए। दो बच्चों की मौत से मधवापुर गांव में भी मातम छा गया। गांव के अधिकांश लोग कोतवाली पहुंच गए। घरवालों ने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि हंसती-खेलती बच्चों की जिंदगी चंद मिनटों में मौत की मुंह में समां जाएगी।