गोरखपुर के रहने वाले बदमाशों ने भट्ठा मालिक की गोली मारकर हत्या की थी। घटना को अंजाम देने से पहले भट्ठे से लेकर मृतक के घर तक बकायदा रेकी की गई थी। चुनाव वाले दिन को बदमाशों ने इसलिए चुना, क्योंकि पुलिस चुनाव में व्यस्त थी ऐसे में वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाशों को भागने में आसानी रहती। वारदात के बीस दिन बाद पुलिस की पड़ताल में इस बात का खुलासा हुआ है। हालांकि बदमाशों की शिनाख्त होने के बाद पुलिस उनकी गिरफ्तारी से बच रही है। एक दिसंबर को प्रधानी का दूसरे चरण का चुनाव था। इसी दिन भलुअनी इलाके के टेकुआ निवासी जितेन्द्र यादव की बाइक सवार दो बदमाशों ने ईंट भट्ठे पर पहुंचकर हत्या कर दी थी। शूटरों ने घटना के लिए सुबह साढे़ सात बजे का समय चुना। भट्ठे पर घूमकर ईंटों का लाट देखा और मुंशी रेट पूछा। इस दौरान जितेन्द्र घर पर थे। थोड़ी देर बाद जितेन्द्र यादव भट्ठे पर पहुंचे। बातचीत के दौरान बदमाशों ने उनके सिर में सटाकर गोली मार दी थी। मौके पर जितेन्द्र की मौत हो गई। हत्या को राजनीति से जोड़कर देखा जाने लगा। घटना में सिंगही निवासी जितेन्द्र सिंह और उनके भाई और दो अज्ञात लोगों पर केस दर्ज हुआ। आरोपियों के घरवालों ने फर्जी तरीके से फंसाने की बात कहकर पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। एसपी के निर्देश पर पूरे मामले की पड़ताल शुरू कराई गई। सूत्रों ने बताया कि जांच के बाद पता चला कि घटना को अंजाम देेने वाले शूटर गोरखपुर के रहने वाले हैं। दोनों बदमाश गोरखपुर के पूर्व प्रमुख के शातिर बेटे की गिरोह में काम करते हैं। हत्या, लूट जैसे कई वारदातों में वांछित है। हत्या के लिए इनको मोटी करम उपलब्ध कराई गई थी। पुलिस शूटर और नामजद आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। सीओ सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। कुछ क्लू मिले है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सब कुछ साफ हो जाएगा।