फर्जी बैनामे का मामला प्रकाश में आया है।
तहसील के उपनिबंधक कार्यालय में फर्जी बैनामे से संबंधित मामला प्रकाश में आया है। मामले में भाई ने बैनामा विलेख पत्र पर अपनी फोटो लगाकर भाई की जमीन का रजिस्ट्री कर दिया। क्रेता को पता चलने पर उसने सहायक महानिरीक्षक निबंधक से अपील की। जांच के उपरांत एआईजी निबंधक ने तहसील के एक अधिवक्ता सहित तीन लोगों पर घोखाधड़ी का केस दर्ज कराने का ओदश दिया है।
सहायक महानिबंधक देवरिया रामानंद सिंह ने परीक्षण उपरांत फर्जी विलेख का पंजीकरण रद कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि अगस्त 2015 में दीनापार के रहने वाले हरिशरन ने अपने भाई देवी शरन की जमीन को अपना फोटो लगाकर निबंधन कार्यालय रुद्रपुर में छबिराजी देवी के हक में रजिस्ट्री कर दिया। क्रेता छबीराजी देवी जब मौके पर जमीन पर कब्जा करने गई तो देवीशरन ने उसे रोक दिया। जांच में हरिशरन ने अपने भाई की जगह पर अपनी फोटो लगाकर कूटरचित फोटो आईडी के आधार पर बैनामा किया।
मतदाता सूची से मिलान में हरिशरन की फोटो देवी शरन से भिन्न पाई गई। कूट रचना कर बैनामा कराने में एक अधिवक्ता सहित दो लोगों की संलिप्तता के आधार पर सहायक महानिरीक्षक ने हरिशरन, प्रेमशंकर और आनंद शंकर मणि अधिवक्ता पर आपराधिक केस दर्ज करने का उपनिबंधक रुद्रपुर को आदेश दिया है। इस बाबत उपनिबंधक वाल्मीकि तिवारी ने कहा कि तहरीर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने को भेज दी गई है। कोतवाली से एफआईआर की कापी नहीं मिली है।