खुखुंदू। बेटे की हरकतों से आजिज पिता ने श्रवण पासवान की हत्या की सुपारी दी थी। 50 हजार रुपये के खातिर दो युवकों ने सिर जमीन पर पटक कर और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी। हत्या को आत्महत्या में बदलने के लिए शव को सूखे नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने रविवार को भाड़े के हत्यारोपियों और पिता को गिरफ्तार कर हत्याकांड का पर्दाफाश किया।
रुपई गांव के गोवर्धन पासवान के बेटे 25 वर्षीय श्रवण पासवान की लाश गांव से पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थित सूखे नहर में 10 अप्रैल को मिली थी। बकरी चरा रहे बच्चों ने लाश देखकर शोर मचाया था। घर वालों ने मौके पर पहुंचकर लाश की पहचान की थी। मृतक के मुंह और कान से खून निकला देखकर लोगों ने हत्या की आशंका जताई थी। पिता ने अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस ने शव को पीएम के लिए भेजा था। पीएम में दम घुटने से मौत की रिपोर्ट आने के बाद पुलिस हत्या से पर्दा हटाने में जुट गई थी। पुलिस ने सबसे पहले पिता गोवर्धन से पूछताछ की। पुलिस की पूछताछ में वह उलझ गया। कड़ाई से पेश आने पर उसने पुलिस के सामने सच्चाई उगल दी। पुलिस के अनुसार गोवर्धन और उसका परिवार श्रणव की हरकतों से आजिज आ चुका था। श्रवण की शादी हो चुकी थी लेकिन उसकी हरकतों और नशे का आदी होने के कारण आठ माह से पत्नी मायके में रह रही है। गोवर्धन के पांच बेटे हैं। श्रवण दूसरे नंबर था। उसने बड़े भाई की पत्नी से संबंध बना रखा था। बेटे के इन हरकतों की वजह से ही पिता ने उसे रास्ते से हटाने की ठान ली थी। इसके लिए उसने खजरी करौता निवासी टेंपो चालक अखिलेंद्र कुशवाहा ऊर्फ कलेक्टर और सदर कोतवाली के बैकुंठपुर निवासी निक्की यादव को 50 हजार रुपसे में बेटे की हत्या करने की सुपारी दी। पुलिस के अनुसार घटना वाले दिन सुबह 10 बजे कलेक्टर
साइकिल से श्रवण के घर पहुंचा और गाय खरीदने की बात कह भटनी थाना के बेलवा बाबू ले गया। वहां से लौटते वक्त शाम हो गई। रास्ते में ही कलेक्टर ने निक्की को फोन कर रुपई गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर बुलाया। वहां तीनों ने शराब पी। इसके बाद श्रवण का सिर जमीन पर पटक दिया और गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या को आत्महत्या में बदलने के लिए लाश को सूखे नहर में फेंक दिया। इंस्पेक्टर नीतीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हत्या में शामिल अखिलेंद्र और निक्की को भरथुआ चौराहे पर तथा पिता गोवर्धन को नूनखार रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया है। तीनों भागने की फिराक में थे।