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बिजली गिरने से मां, दो मासूमों की मौत

Tue, 09 May 2017 11:48 PM IST
deoria
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घ्‍ाटना - फोटो : amarujala
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रुद्रपुर। 
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एक मजदूर के कुनबे पर सोमवार की रात बिजली वज्रपात बनकर टूट पड़ी। अमौनी स्थित ईंट-भट्ठे पर गिरी बिजली ने मां और दो मासूम बच्चों की जान ले ली। मजदूर और उसके दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।  
मठिया गांव के रहने वाले नन्हे प्रसाद का पूरा परिवार अमौनी स्थित ईंट-भट्ठे पर ईंट पाथने का काम करता है। पेट की आग बुझाने के लिए पूरा परिवार दिन-रात हाड़तोड़ मेहनत करता था। बच्चे भी मां-बाप के काम में हाथ बंटाते रहे। सोमवार की रात 11 बजे तक ईंट पाथने के बाद 38 वर्षीय नन्हे और 35 वर्षीय पत्नी संगीता, बेटा सचिन (12), शहबाज (8), चुन्नू (6), बेटी वंदना (18) और चांदनी दो वर्ष बाहर सो रहे थे। रात करीब तीन बजे अचानक आंधी-पानी आने पर पूरा परिवार पास में कटरैन के बने घर के अंदर चला गया। तभी बारिश के बीच अचानक बिजली तड़की। बिजली गिरने से संगीता, बेटे सचिन और बेटी चांदनी की मौत हो गई। नन्हे और उसकी बड़ी बेटी वंदना घायल हो गईं। घायलावस्था में दोनों बच्चों और पत्नी को लेकर मजदूर अस्पताल पहुंचा। घटना की सूचना मिलते ही पूरा गांव अस्पताल पर उमड़ पड़ा। डॉक्टर ने मजदूर की पत्नी और दो बच्चों को मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। भाई-बहन और मां के शरीर से लिपट कर मजदूर और बच्चे बिलखने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसडीएम घनश्याम नायब, तहसीलदार डॉ. संजीव दीक्षित ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मजदूर  को हर संभव सरकारी सहायता मुहैया कराई जाएगी।
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बेटी के हाथ पीले करने को कर रहे थे मेेहनत 
रुद्रपुर। 
ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर के कुनबे पर गिरी बिजली ने उसके अरमानों को चकनाचूर कर दिया। गरीबी और मुफलिसी ने जहां उसके मासूम बच्चों के हाथों में किताब की जगह कुदाल थमा दिया, वहीं प्रकृति के कहर ने जवान बेटी के हाथ पीले करने के सपने को भी धो डाला।
मठिया माफी गांव के रहने वाले नन्हे प्रसाद का पूरा परिवार 18 वर्षीय बेटी की शादी के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था। उसने बेटी की शादी धूमधाम से करने की ठान रखी थी। इस कारण वह गांव छोड़कर पूरा परिवार लेकर अमौनी गांव के पास ईंट-भट्ठे पर काम रहा था। ईंट पाथने में पत्नी और बच्चे भी हाथ बंटाते थे। अधिक मजदूरी कमाने के उद्देश्य से आधी-रात तक पूरा परिवार ईंट पाथता और सुबह उठकर फिर काम में जुट जाता। नन्हे के छह बच्चों में वंदना सबसे बड़ी है। शादी का बोझ और पेट की भूख मिटाने में बच्चों की पढ़ाई भी बर्बाद हो गई।  जिन बच्चों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए उन्हें नियति ने कुदाल थामने पर मजबूर कर दिया। सोमवार की रात गिरी बिजली से दो वर्ष की चांदनी,12 वर्ष के सचिन और उसकी मां संगीता पर मौत बनकर टूटी। घायल मजदूर के सामने ही उसके दो बच्चों और बीबी ने तड़प कर दम तोड़ दिया। उनकी मौत पर वह चीख कर बेहोश हो जा रहा था। वह यही कह कर अचेत हो जा रहा था कि पेट के लिए घर छोड़कर बच्चों को कुदाल चलाना पड़ा। हे भगवान! हमने आप का क्या बिगाड़ा था।


ईंट-भट्ठों पर बर्बाद हो रहा बचपन    
रुद्रपुर। 
ईंट-भट्ठे पर मजदूरों के बच्चों का बचपन बर्बाद हो रहा है। बिजली गिरने से एक मजदूर के बच्चों और बीबी की मौत ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी को शिक्षा देने के अधिकार की कलई खोल दी। इलाके के दर्जनों ईंट-भट्ठों पर स्कूल जाने लायक बच्चे मिट्टी और कीचड़ में काम करने के लिए मजबूर हैं।
अमौनी स्थित ईंट-भट्ठे पर बिजली गिरने से हुई मजदूर के परिवार के दो बच्चों की मौत कई कहानी बयां करने लगी है। मंगलवार को तहसील का प्रशासनिक अमला जब भट्ठे पर पहुंचा तो मजदूरों के बच्चे कीचड़ में काम करते देखे गए। उनकी हालत देखकर प्रशासनिक अधिकारियों को आंखें छिपानी पड़ीं। शिक्षा के अधिकार से वंचित इन बच्चों का बचपन ईंट-भट्ठे पर न सिर्फ बर्बाद हो रहा है बल्कि रहन-सहन भी आदिवासियों की तरह है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत छह से 14 वर्ष के बच्चों को भारत सरकार नि:शुल्क शिक्षा देने की गांरटी देती है लेकिन ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों की हालत अभियान की कुछ और ही कहानी बता रही है।  खेलने-पढ़ने की उम्र में उनके काम करने से बाल मजदूरी को प्रश्रय मिल रहा है। बाल मजदूरी रोकने को बना श्रम विभाग यह सब कुछ जान कर भी अंजान बना है। एसडीएम घनश्याम ने कहा कि ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले बच्चों का नामांकन कराने को शिक्षा विभाग को निर्देशित किया जाएगा। बाल मजदूरी रोकने को श्रम विभाग को भी अवगत कराया जाएगा।

ईंट-भट्ठे पर नहीं लगा था तड़ित चालक      
रुद्रप़ुर। 
ईंट-भट्ठे और कंपनियों पर बिजली गिरने से रोकने को तड़ित चालक लगवाने का निर्देश है। इसके बावजूद भट्ठे की चिमनी पर तड़ित चालक नहीं लगा था। यदि अमौनी गांव के ईंट-भट्ठे पर बिजली गिरने से रोकने का यंत्र लगा होता तो शायद हृदय विदारक घटना नहीं घटती। 
बड़ी-बड़ी इमारतों, सिनेमा हाल, माल, टावर और ईंट-भट्ठों पर बिजली गिरने से रोकने के लिए तड़ित चालक लगाया जाता है। जहां यह यंत्र लगा होता है, उसके 400 मीटर के परिक्षेत्र में बिजली नहीं गिरती। रुद्रपुर क्षेत्र के अधिकांश ईंट-भट्ठों पर तड़ित चालक नहीं लगे हैं। सोमवार की रात मजदूर का कुनबा ईंट-भट्ठे की चिमनी से 200 मीटर की दूरी पर सो रहा था। यदि भट्ठे की चिमनी पर तड़ित चालक लगा होता तो शायद यह हादसा नहीं होता। एसडीएम घनश्याम ने कहा कि घटना स्थल का निरीक्षण कर ईंट-भट्ठे पर मानक के अनुरूप व्यवस्था नहीं होने की रिपोर्ट भेजी गई है। क्षेत्र के अन्य भट्ठों की जांच कर तड़ित चालक लगवाने का निर्देश दिया जाएगा।      
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मजदूर के गांव पहुंचे डीएम      
रुद्रपुर। डीएम सुजीत कुमार पीड़ित मजदूर के परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। मंगलवार को मठिया पहुंचे डीएम ने मजदूर के परिवार को जल्द ही हर संभव सरकारी सहायता मुहैया कराने का आश्वासन दिया। उधर, सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने मजदूर के परिवार में हुई मौत को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने शासन से मजदूर के परिवार के प्रत्येक मृत सदस्य को पांच-पांच लाख रुपये की अहेतुक सहायता देने की मांग की।
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